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मामला गुप्त रखने के बाद भी भंडाफोड़ हो गया है

नेतन्याहू ने चुपचाप यूएई का दौरा किया है

येरूशलमः पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और कूटनीतिक हलचल के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात का एक अत्यंत दुर्लभ और गोपनीय दौरा किया है। प्राप्त खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को यूएई की राजधानी अबू धाबी की अचानक यात्रा की और वहां देश के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक की पुष्टि दोनों पक्षों के अधिकारियों द्वारा कर दी गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस यात्रा को सुरक्षा कारणों और कूटनीतिक संवेदनशीलता के चलते काफी गोपनीय रखा गया था, जिसकी भनक शुरुआती दौर में मीडिया को नहीं लग पाई थी।

यह महत्वपूर्ण दौरा ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में ईरान के साथ चल रहे तनाव और विभिन्न क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चाएं अपने चरम पर हैं। इसके अलावा, इस यात्रा को लेकर राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि हाल के महीनों में इजराइल और यूएई के बीच के संबंधों और अक्टूबर 2023 की घटनाओं से जुड़ी कुछ संवेदनशील रिपोर्ट्स पर भी बातचीत हुई होगी। वर्ष 2020 में अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंध स्थापित हुए थे, लेकिन क्षेत्रीय संघर्षों और गाजा तथा अन्य मुद्दों पर उपजे तनाव के बीच इस तरह की शीर्ष नेताओं की मुलाकातें बेहद अहम मानी जा रही हैं। दोनों देशों के बीच यह दुर्लभ संवाद यह दर्शाता है कि पश्चिम एशिया के देश बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच आपसी संपर्क और कूटनीतिक संवाद को बनाए रखने के लिए कितने गंभीर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गुप्त और अचानक हुई बैठक के दौरान मुख्य रूप से क्षेत्रीय स्थिरता, रक्षा सहयोग और साझा रणनीतिक हितों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय और यूएई के आधिकारिक सूत्रों की तरफ से इस यात्रा की पुष्टि होने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि खाड़ी देशों और इजराइल के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक गतिविधियां किस प्रकार तेजी से आकार ले रही हैं। आने वाले दिनों में इस उच्च स्तरीय मुलाकात के क्या दीर्घकालिक परिणाम सामने आते हैं, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।