Breaking News in Hindi

ज्ञानेश कुमार के घर के बाहर लिखा गद्दार

कांग्रेस कार्यकर्ताओँ का आगरा में भी जोरदार प्रदर्शन

कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के बाद विरोध

स्प्रे पेंट से घर की दीवार पर लिख दिया

पुलिस मामले की जांच करने में जुटी

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त भारी उबाल आ गया जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आगरा में स्थित मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास के बाहर एक अत्यंत विवादित घटना सामने आई, जहां प्रदर्शनकारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके घर के मुख्य गेट और दीवारों पर स्प्रे पेंट से गद्दार ज्ञानेश और वोट चोर जैसे आपत्तिजनक नारे लिख दिए।

यह पूरा विरोध प्रदर्शन हाल ही में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस और चुनाव पैनल के बीच चल रहे तीखे टकराव और तनातनी के माहौल के बीच हुआ है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है और सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता पहले एक पैदल मार्च निकालते हुए स्थानीय कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इसके बाद कुछ कार्यकर्ता अचानक विजय नगर स्थित ज्ञानेश कुमार के आवास पर पहुंच गए और वहां जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

विरोध प्रदर्शन के दौरान घर की दीवारों पर कालिख पोतने और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करने की इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत स्वतः संज्ञान लिया और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इस घटना में शामिल प्रमुख कार्यकर्ताओं की पहचान कर उनकी धरपकड़ तेज कर दी है और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।

दूसरी ओर, इस घटना की विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव जैसे संवैधानिक संस्थानों के प्रमुखों के खिलाफ इस तरह के व्यक्तिगत हमलों और अमर्यादित प्रदर्शनों की कड़े शब्दों में निंदा की है।

उनका कहना है कि विपक्षी दल अपने राजनीतिक स्वार्थ और विफलताओं को छिपाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। बहरहाल, इस घटना के बाद से उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच का राजनीतिक संघर्ष और अधिक गहरा गया है, और सुरक्षा एजेंसियों तथा प्रशासन द्वारा इस मामले में आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।