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शराब घोटाला पर दिल्ली की अदालत का फैसला क्या कहता है

एजेंसी ने साजिश के तहत मामला दर्ज किया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली आबकारी नीति मामले में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहाँ दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले की जाँच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया है। यह आदेश उसी दिन आया जब अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में शामिल सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया।

इस फैसले के तहत अदालत ने यह राय जाहिर की है कि साजिश के तहत मामला दर्ज करने के बाद एक एक कर आरोपियों को जेल में भेजा गया और कड़ी से कड़ी जोड़ने की बात कही गयी। दूसरी तरफ वास्तविक साक्ष्य के नाम पर जांच एजेंसी के पास मामला चलाने के नाम पर कभी कुछ नहीं था। सिर्फ इसका माहौल बनाया गया जबकि सारा मामला ही अनुमानों पर आधारित था।

अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने अवलोकन में संकेत दिया कि जाँच प्रक्रिया में निष्पक्षता की कमी हो सकती है। अदालत ने जाँच को पूर्वनिर्धारित बताते हुए सीबीआई अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए।

आदेश में कहा गया है कि जाँच का तरीका पेशेवर मानकों के अनुरूप नहीं था, जिसके कारण विभाग को अधिकारी की जवाबदेही तय करनी चाहिए। यह फैसला न केवल आम आदमी पार्टी के नेताओं के लिए एक बड़ी कानूनी राहत है, बल्कि यह केंद्रीय जाँच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस मामले में हुई इन गिरफ्तारियों ने लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति और प्रशासन को प्रभावित किया था। आरोपियों को बरी किए जाने और जाँच अधिकारी पर कार्रवाई के आदेश के बाद अब इस मामले के राजनीतिक गलियारों में और गरमाने की संभावना है।