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जय श्री राम के नारे के बीच पिट गया साधु

भाजपा पर लगा धर्म के बहाने राजनीतिक प्रचार का आरोप

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के भगवानपुर थाना अंतर्गत गुड़ग्राम में शनिवार को उस समय भारी तनाव फैल गया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन में हिंसक झड़प हो गई। साधु-संतों की उपस्थिति में शुरू हुई यह सभा देखते ही देखते एक राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई।

इस घटना ने एक बार फिर बंगाल की धरती पर धर्म और राजनीति के आपसी टकराव को उजागर कर दिया है। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरएसएस के 100 साल पूरे होने के अवसर पर एक धर्म सभा का आयोजन किया गया था। आरोप है कि जब सम्मेलन चल रहा था और वहां जय श्री राम के नारे लगाए जा रहे थे, तब तृणमूल कांग्रेस के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंचकर इन नारों पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि धार्मिक मंच का उपयोग राजनीतिक नारेबाजी के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। इस हंगामे के दौरान वहां मौजूद एक साधु को शारीरिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित करने का गंभीर आरोप लगा है। उत्तेजित भीड़ ने वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति की भी पिटाई कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग इधर-उधर भागने लगे।

जैसे ही घटना की सूचना भगवानपुर पुलिस स्टेशन को मिली, पुलिस की एक बड़ी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और घायल साधु को तुरंत चंडीपुर अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, साधु की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें काफी मानसिक और शारीरिक चोटें आई हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है और घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। इलाके में फिर से कोई हिंसा न भड़के, इसके लिए गुड़ग्राम और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर दोषियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। तृणमूल पंचायत समिति के अध्यक्ष अरूप सुंदर पंडा ने भाजपा और आरएसएस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, भाजपा, आरएसएस को ढाल बनाकर धार्मिक सभा के नाम पर केवल राजनीतिक प्रचार कर रही थी। वहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी अपमानजनक और अभद्र टिप्पणियां की गईं, जिसका स्थानीय क्लब के सदस्यों ने विरोध किया। हम किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते, लेकिन उकसावे की भी एक सीमा होती है।