Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lok Sabha Update: भारी हंगामे के कारण पीएम मोदी का संबोधन रद्द, 8 सांसदों के निलंबन और नरवणे की किता... Kishtwar Encounter: किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़, एक आतंकी ढेर; ऑपरेशन अभ... MP Politics: 'ब्राह्मण समाज सबकी आंखों में खटक रहा है...', बीजेपी विधायक गोपाल भार्गव के बयान से मध्... Rajya Sabha Update: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में टकराव के आसार! PM मोदी के भाषण से पहले कांग्रेस ने... Pune-Mumbai Expressway: पुणे एक्सप्रेस-वे पर 24 घंटे से लगा महाजाम, हजारों गाड़ियां फंसी; सीएम फडणवी... बृहस्पति के बादलों के पीछे छिपा है एक विशाल रहस्य बड़े नेताओं की अग्निपरीक्षा का दौर अब चालू हो गया सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी का नया रिकार्ड जनरल नरवणे की चर्चा कर राहुल ने फिर घेरा भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर जानकारी पर बवाल

महाशिवरात्रि 2026 पर बरसेगी महादेव की विशेष कृपा, इन 2 शुभ योगों में पूजा करने से मिलेगा दोगुना फल

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्ति का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. साल 2026 में महाशिवरात्रि

का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल की महाशिवरात्रि बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन दो ऐसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने की शक्ति रखते हैं.आइए जानते हैं इन शुभ संयोगों के बारे में और क्या है पूजा का सही मुहूर्त.

सर्वार्थ सिद्धि योग

पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी को सुबह 07:00 बजे से शाम 07:48 बजे तक (12 घंटे से अधिक) सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, दान या नया कार्य व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है. अगर आपके काम लंबे समय से अटके हैं, तो इस समय में रुद्राभिषेक करना बहुत ही लाभकारी होगा.

श्रवण नक्षत्र और शिववास

शाम 07:48 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा. शास्त्रों में श्रवण नक्षत्र को शिव साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. साथ ही इस दिन शिववास का संयोग भी है, जो रुद्राभिषेक के फल को कई गुना बढ़ा देता है.

महाशिवरात्रि की पूजा विधि (Puja Vidhi)

यदि आप इस विशेष दिन पर महादेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें.

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें.

पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल (पंचामृत) से अभिषेक करें.

प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: महादेव को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, मदार के फूल और भस्म अर्पित करें.

मंत्र जाप: पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप करते रहें.

दीपदान और आरती: शाम के समय और निशिता काल में शिव चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती करें.

महाशिवरात्रि का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि का व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है और विवाहित महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है. आध्यात्मिक दृष्टि से यह रात्रि जागरण और अपनी चेतना को जागृत करने का महापर्व है.