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आईईडी विस्फोट में ग्यारह जवान घायल

माओवादियों ने जंगल में बिछा रखा था अपना जाल

राष्ट्रीय खबर

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान के बीच, बीजापुर जिले से एक बड़ी घटना सामने आई है। सोमवार, 26 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार, माओवादियों द्वारा सुनियोजित तरीके से लगाए गए छह आईईडी विस्फोटों की चपेट में आने से 11 सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह घटना रविवार को उस समय हुई जब सुरक्षा बल गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा रहे थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को तेलंगाना सीमा से सटे उसूर पुलिस थाना क्षेत्र की करेगुट्टा पहाड़ियों में वरिष्ठ माओवादी नेताओं की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी। इस इनपुट के आधार पर एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया था। इस रणनीतिक ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस की विशेष इकाइयां—डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स—तथा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की जंगल युद्ध में माहिर विशिष्ट इकाई कोबरा की 210वीं बटालियन के जांबाज शामिल थे।

जैसे ही संयुक्त दल करेगुट्टा की पहाड़ियों और घने जंगलों की घेराबंदी कर रहा था, नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए आईईडी में एक के बाद एक कुल छह धमाके हुए। इन विस्फोटों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी चपेट में आने से कम से कम 11 जवान घायल हो गए। घायल जवानों में 10 जवान डीआरजी के हैं, जबकि एक कोबरा यूनिट के सब-इंस्पेक्टर रुद्रेश सिंह हैं।

अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, एसआई रुद्रेश सिंह और दो डीआरजी जवानों के पैरों में गंभीर चोटें आई हैं, जिससे उनके अंगों को स्थायी नुकसान होने का खतरा है। वहीं, तीन अन्य जवानों के चेहरे और आँखों में विस्फोट के तीखे स्प्लिंटर (छर्रे) घुस गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, घायल जवानों को तुरंत हेलीकॉप्टर के जरिए रायपुर एयरलिफ्ट किया गया। रायपुर के एक निजी अस्पताल में विशेषज्ञों की टीम उनका इलाज कर रही है, जहाँ अब तक चार जवानों की सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

करेगुट्टा और ताड़पला का यह इलाका लंबे समय से माओवादियों का अभेद्य किला माना जाता रहा है। पिछले साल नवंबर में ही सुरक्षा बलों ने ताड़पला गाँव में एक नया कैंप स्थापित कर नक्सलियों की सप्लाई चेन को बाधित किया था। इससे पहले अप्रैल-मई 2025 में इसी क्षेत्र में चले 21 दिनों के एक सघन अभियान के दौरान 31 माओवादी मारे गए थे और भारी मात्रा में विस्फोटक, अत्याधुनिक हथियार और तकनीकी उपकरण बरामद हुए थे। ताजा हमला इसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है, जहाँ नक्सली अब सीधे टकराव के बजाय प्रेशर बम और आईईडी का उपयोग कर सुरक्षा बलों की गति को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।