आसमान के अनोखे नजारे को देख रहे हैं सैटेलाइट
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: मौसम विज्ञान विभाग और अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा जारी नवीनतम सैटेलाइट तस्वीरों ने पूरे एशिया महाद्वीप में मानसून के एक बेहद दुर्लभ और विशालकाय रूप का खुलासा किया है। तस्वीरों में उत्तर भारत से शुरू होकर विशाल हिमालयी श्रृंखला, चीन और जापान को पार करते हुए दक्षिण कोरिया तक फैली 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबी बारिश देने वाले बादलों की एक विशाल पट्टी दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अभूतपूर्व मौसमी संरचना वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सबसे उग्र और सक्रिय चरणों में से एक का स्पष्ट संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानसून कन्वर्जेंस जोन के रूप में पहचानी जाने वाली यह विशालकाय बादलों की रेखा तब अस्तित्व में आई, जब हिंद महासागर से उठीं असाधारण रूप से नमी से लदी मानसूनी हवाएं पूरे एशियाई महाद्वीप में फैले अन्य स्थानीय मौसम प्रणालियों के साथ टकराईं। इस भौगोलिक और वायुमंडलीय स्थिति के चलते हजारों किलोमीटर में फैले घने बादलों और अनवरत बारिश का एक विशाल गलियारा निर्मित हो गया है।
मौसम के इस अद्भुत और आक्रामक मिजाज के कारण भारत के विशाल भूभाग में असाधारण और रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। वर्षा के ताजा आंकड़ों और अनुमानों के अनुसार, देश में पिछले 48 घंटों के दौरान सामान्य दैनिक मानसूनी बारिश की तुलना में लगभग 170 से 180 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इसने मौजूदा मानसूनी सीजन के सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे यह इस साल का अब तक का सबसे अधिक बारिश वाला समय बन गया है।
वरिष्ठ मौसम विज्ञानियों ने इस मानसूनी स्थिति को विशाल मानसून दिवस का नाम दिया है, क्योंकि देश के कई प्रमुख राज्यों में वर्षा का स्तर सामान्य जलवायु संबंधी औसत से कहीं अधिक दर्ज किया गया है। उपग्रह से प्राप्त चित्रों में मध्य, उत्तरी और पूर्वी भारत के विशाल भूभाग को बादलों की बेहद मोटी चादर से ढका हुआ देखा जा सकता है, जो पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ों से गुजरते हुए चीन और जापान तक फैली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब ‘मानसून ट्रफ’ अपनी सामान्य स्थिति में अत्यधिक सक्रिय होता है, तब वायुमंडलीय अभिसरण (कन्वर्जेंस) गर्म और अत्यधिक नमी युक्त हवा को तेजी से ऊपर उठने वाले एक बड़े क्षेत्र में खींचता है। यह नम हवा जैसे-जैसे वायुमंडल में ऊपर की ओर उठती है, ठंडी होकर विशाल वर्षावाही बादलों में संघनित हो जाती है, जिससे भारत सहित एशिया के एक बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश, बिजली कड़कने और तीव्र आंधी-तूफान का दौर जारी है।