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दिन भर दिल्ली में लाठी खाने के बाद भी कम नहीं हुआ जज्बा

जादवपुर में वामपंथी समारोह में शामिल हुए नेहा बोरा

आरएसएस और भाजपा पर तीखा हमला

प. बंगाल में एसआईआर  का विरोध

छात्रों से जुड़े मुद्दों पर भी बोलीं वह

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोमवार, 5 अक्टूबर को जादवपुर विश्वविद्यालय में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए छात्र एकजुटता का आह्वान किया। उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें आपसी एकजुटता मजबूत करनी होगी और हर दिन प्रतिरोध जारी रखना होगा। वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा जेन-जी मूवमेंट: यूनिटी ऑफ जनरेशन एंड रेजिस्टेंस विषय पर आयोजित इस कन्वेंशन में उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर जमकर निशाना साधा।

नेहा बोरा ने भाजपा और आरएसएस पर प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए कहा, आज कुछ लोगों को अपनी ताकत पर बहुत गर्व है और उन्हें लगता है कि वे हमें पीटकर घुटने टेकने पर मजबूर कर सकते हैं। वे सोचते हैं कि जंतर-मंतर, जादवपुर विश्वविद्यालय और एसआरएफटीआई में छात्रों को पीटकर वे हमें झुका सकते हैं। लेकिन वे यह नहीं समझते कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोग कभी किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।

उन्होंने वियतनाम, क्यूबा, ईरान और लैटिन अमेरिका के वामपंथी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर के फासीवादियों को यह अच्छी तरह पता है कि जब जन आंदोलनों ने सत्ता को चुनौती दी है, तो वामपंथियों ने क्या कुछ करके दिखाया है।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए बोरा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, वे लोहे की मुट्ठी से बंगाल पर शासन करना चाहते हैं और इसीलिए उन्होंने बंगाल के लिए एसआईआर तैयार किया है। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र कोई अमूर्त अवधारणा नहीं है, बल्कि पंचायत स्तर से लेकर शीर्ष केंद्रीय पदों तक एक वादा है कि आम लोग वोट के शक्तिशाली तंत्र के जरिए फैसले लेंगे। भाजपा ने हमारे बुनियादी वोटिंग अधिकार छीने हैं, लेकिन हम उनके लोकतंत्र को नष्ट करने के प्रयासों को सफल नहीं होने देंगे।

जादवपुर विश्वविद्यालय के के.पी. बसु मेमोरियल हॉल की क्षमता से कहीं अधिक लोगों की उपस्थिति वाले इस सम्मेलन में एनईपी को रद्द करने, एनटीए, एसआईआर और आईएसआई से जुड़े विधेयकों को वापस लेने की मांग की गई। इसके अलावा सेव स्कूल्स, सेव एजुकेशन अभियान का भी समर्थन किया गया। हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आपत्ति जताई और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को ईमेल भेजकर पूछा कि एक बाहरी राजनीतिक हस्ती को परिसर में कार्यक्रम की अनुमति कैसे दी गई। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार देबजीत दत्ता ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस आयोजन की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और यह अनुमति उनके बजाय संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित थी।