सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र को चेतावनी दी
केंद्र के निर्देश पर ऐसा किया गया
हर दिन हजारों पोस्ट हटाया जा रहा
अदालत तक पहुंच गया है यह मामला
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर सरकार विरोधी पोस्ट्स और अकाउंट्स के खिलाफ की जा रही कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि सामग्री को हटाकर नागरिकों की आवाज बंद करने से जनता की शिकायतें दूर नहीं होंगी।
बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दीपके ने लिखा, इंस्टाग्राम पर की जा रही यह कार्रवाई काम नहीं करने वाली है! सरकार हर दिन हजारों पोस्ट और अकाउंट्स हटा रही है, लेकिन वह एक बुनियादी बात को समझने में चूक रही है। इंस्टाग्राम सिर्फ एक ऐसा मंच है जहां लोग अपने सवाल उठा रहे हैं। उन सवालों के पीछे के कारण सोशल मीडिया से परे वास्तविक दुनिया में मौजूद हैं, और अकाउंट्स हटा देने से वे गायब नहीं हो जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कथित सेंसरशिप से उन लोगों के बीच विश्वास और कम हो सकता है, जिनके प्रति सरकार जवाबदेह है।
उनकी यह टिप्पणी ऑनलाइन कंटेंट पर प्रतिबंधों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ रही समीक्षा के बीच आई है। कार्यकर्ताओं और राजनीतिक समूहों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत जारी किए गए निर्देशों और अकाउंट निलंबन पर चिंता जताई है। केंद्र सरकार द्वारा मेटा और एक्स सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को युवा बेरोजगारी, शासन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाने वाले पोस्ट्स और हैंडल्स को प्रतिबंधित करने के लिए कहा गया है।
आलोचकों का तर्क है कि ऑनलाइन सामग्री को प्रतिबंधित करने से बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, शासन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी अंतर्निहित समस्याएं समाप्त नहीं होती हैं। यह मामला अब अदालत तक भी पहुंच गया है। 27 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत में इंस्टाग्राम हैंडल को रोके जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और संबंधित विभाग को नोटिस जारी किया। यह अकाउंट मिशन सेव कॉन्स्टिट्यूशन के ब्रिंग बैक बैलेट अभियान और इसके राष्ट्रीय संयोजक अधिवक्ता महमूद प्राचा से जुड़ा है।
याचिका में कहा गया है कि इस हैंडल को 10 अक्टूबर को उस दिन बंद किया गया था, जिस दिन आयोजकों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय स्क्रीन पर संदेश दिखाई दे रहा था: भारत में अकाउंट उपलब्ध नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने इस सामग्री को प्रतिबंधित करने के कानूनी अनुरोध का पालन किया है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कभी कोई नोटिस, सुनवाई, कारण या किसी आदेश की प्रति नहीं दी गई। यह पहल ईवीएम हटाओ देश बचाओ के नारे के तहत मतपत्रों (पेपर बैलेट) पर वापस लौटने की वकालत कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि आयोजकों ने 9 अक्टूबर को ही दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की जानकारी दे दी थी।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने इस मामले में नोटिस जारी कर केंद्र से जवाब मांगा है। केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित ने गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नामित अधिकारी की ओर से नोटिस स्वीकार किया, जबकि अधिवक्ता अमी राणा ने मेटा प्लेटफॉर्म्स की ओर से नोटिस स्वीकार किया।