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भारत का व्यापार घाटा दिसंबर में बढ़कर 25.04 बिलियन डॉलर

आंकड़ों की बाजीगरी के बाद भी ट्रंप टैरिफ का असर दिखा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के व्यापारिक मोर्चे से मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि नवंबर के आंकड़ों के ठीक उलट है, जब व्यापार घाटा गिरकर पांच महीने के निचले स्तर (24.53 अरब डॉलर) पर आ गया था। हालांकि, यह राहत की बात है कि अर्थशास्त्रियों द्वारा लगाए गए 27 अरब डॉलर के अनुमान की तुलना में वास्तविक घाटा कम रहा है।

विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दिसंबर में भारत का माल निर्यात सालाना आधार पर 1.86 फीसद की वृद्धि के साथ 38.51 अरब डॉलर रहा। पिछले वर्ष यानी दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 37.8 अरब डॉलर था। वहीं दूसरी ओर, आयात में भी बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल के 58.43 अरब डॉलर के मुकाबले इस साल दिसंबर में आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आयात और निर्यात के बीच का यही अंतर व्यापार घाटे को बढ़ाने का मुख्य कारण बना है।

वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय निर्यात क्षेत्र में सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय निर्यात लगातार सकारात्मक विकास दर दर्ज कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक भारत का कुल निर्यात 850 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा।

आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए सचिव ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर) में भारत ने कुल 634.26 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 607.93 अरब डॉलर से काफी बेहतर है। सरकार का मानना है कि मेक इन इंडिया और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों के बढ़ते आयात के कारण व्यापार घाटे पर नियंत्रण पाना एक चुनौती बना हुआ है। आने वाले महीनों में वैश्विक मांग और लॉजिस्टिक लागत व्यापार संतुलन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।