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अदालत में ईडी ने कहा कुछ भी जब्त नहीं किया

टीएमसी की याचिका का हाईकोर्ट में निपटारा

  • दोनों तरफ से आरोप प्रत्यारोप लगे

  • डिजिटल सुरक्षा और कोर्ट का आदेश

  • दूसरा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय और तृणमूल कांग्रेस द्वारा राजनीतिक परामर्शदाता फर्म आई पैक के कार्यालयों पर हाल ही में हुई छापेमारी से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई की। कोर्ट ने इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अंततः टीएमसी की याचिका को यह कहते हुए निपटा दिया कि ईडी ने छापेमारी में कुछ भी जब्त नहीं करने की बात स्वीकार की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में जबरदस्त कानूनी बहस देखने को मिली। टीएमसी ने ईडी की कार्रवाई को धौंस दिखाने का असाधारण संकेत करार दिया।

पार्टी ने अदालत से गुहार लगाई थी कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए चुनाव संबंधी डेटा को सुरक्षा प्रदान की जाए। टीएमसी के वकील ने तर्क दिया कि एक राजनीतिक दल को परेशान करना अनुचित है, खासकर जब डेटा एक रणनीतिकार फर्म के पास सुरक्षित रखा गया हो।

केंद्रीय एजेंसी ने टीएमसी की याचिका का कड़ा विरोध किया। ईडी ने सवाल उठाया कि जब छापेमारी किसी अन्य स्थान पर हुई थी, तो कोई तीसरा पक्ष डेटा पर अपना दावा कैसे कर सकता है? ईडी ने स्पष्ट किया कि इस छापेमारी का टीएमसी से कोई सीधा संबंध नहीं था और जिस व्यक्ति के परिसर की तलाशी ली गई, उसने खुद अदालत का रुख नहीं किया है। ईडी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चल रही जांच में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए इसे एक अपराध बताया। एजेंसी ने इस हस्तक्षेप की जांच की मांग भी की है।

मामले की संवेदनशीलता और पहले हुई कोर्ट रूम की अव्यवस्था को देखते हुए, हाईकोर्ट ने बुधवार की सुनवाई को लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से आयोजित किया। कोर्ट रूम में केवल संबंधित वकीलों को ही उपस्थित रहने की अनुमति दी गई थी। अंत में, अदालत ने टीएमसी की याचिका को डिस्पोज कर दिया, क्योंकि ईडी ने आधिकारिक तौर पर यह बयान दर्ज कराया कि 8 जनवरी को फर्म के निदेशक के घर या कार्यालय से कुछ भी जब्त नहीं किया गया था। इस बीच, ईडी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने वहां कैविएट दाखिल की है।