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अमेरिका के राष्ट्रपति ने वेनेजुएला के पड़ोसी देश को चेतावनी दी

क्यूबा से कहा समय रहते समझौता कर लो

वाशिंगटनः वेनेजुएला में हुए नाटकीय सत्ता परिवर्तन और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी ने पूरे लैटिन अमेरिका के राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। इस घटनाक्रम के तत्काल बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना ध्यान अब क्यूबा की ओर केंद्रित कर दिया है। ट्रम्प ने एक बार फिर अपनी सख्त सौदेबाजी वाली शैली का परिचय देते हुए क्यूबा की सरकार को चेतावनी दी है कि वे बहुत देर होने से पहले समझौता कर लें। दशकों से क्यूबा की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा वेनेजुएला के रियायती कच्चे तेल पर निर्भर रहा है। ऑयल-फॉर-सर्विसेज समझौते के तहत, क्यूबा वेनेजुएला को अपने डॉक्टर, सुरक्षा सलाहकार और खुफिया अधिकारी भेजता था, जिसके बदले में उसे भारी मात्रा में सस्ता तेल मिलता था।

अब, मादुरो सरकार के पतन के साथ ही यह लाइफ लाइन पूरी तरह कट गई है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर स्पष्ट संदेश दिया है: क्यूबा को अब वेनेजुएला से कोई तेल या पैसा नहीं मिलेगा—जीरो! यह घोषणा क्यूबा के लिए किसी आर्थिक वज्रपात से कम नहीं है, क्योंकि वेनेजुएला के बिना क्यूबा के पास अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का कोई वैकल्पिक और सस्ता स्रोत मौजूद नहीं है।

ट्रम्प प्रशासन ने क्यूबा की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था को और अधिक सीमित करने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा करने का निर्णय लिया है। वाशिंगटन का मानना है कि समर्थन के अभाव में क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार अब अपने सबसे नाजुक दौर में है। अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य हवाना पर इतना दबाव बनाना है कि वह राजनीतिक सुधारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए मजबूर हो जाए। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि क्यूबा नई शर्तों पर समझौता नहीं करता है, तो उसे गंभीर और अपरिवर्तनीय परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

इस बढ़ते दबाव के बीच, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-नेल ने हार मानने के बजाय कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई को राज्य प्रायोजित आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। डियाज-नेल ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करें। हालांकि, जमीनी स्तर पर क्यूबा में बिजली की भारी कटौती और खाद्य सामग्री की कमी ने जनता के बीच असंतोष पैदा कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या क्यूबा अपनी पुरानी नीतियों पर अड़ा रहता है या अस्तित्व बचाने के लिए अमेरिका के साथ किसी नए समझौते की मेज पर आता है।