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ईरान के कहा, युद्ध की तैयारी पर वार्ता का विकल्प खुला

विरोध प्रदर्शन और हिंसा में पांच सौ से अधिक लोग मरे

तेहरानः ईरान वर्तमान में अपने आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक तरफ देश के भीतर सुलगती जन-क्रांति है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ युद्ध के मुहाने पर खड़ी विदेशी सीमाएं। इस बेहद संवेदनशील स्थिति के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का हालिया बयान तेहरान की बदली हुई दोहरी रणनीति को दर्शाता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी रक्षा के लिए सैन्य शक्ति के उपयोग से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन वह कूटनीति के माध्यम से युद्ध को टालने का अंतिम प्रयास भी करना चाहता है।

ईरान के भीतर मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब एक व्यापक विद्रोह का रूप ले चुका है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा की गई दमनकारी कार्रवाई में अब तक 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है। तेहरान, मशहद और शिराज जैसे प्रमुख शहरों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें आम हो गई हैं। इंटरनेट पर पाबंदियों के बावजूद, वहां से आ रही तस्वीरें और वीडियो ईरान की दमनकारी नीति को वैश्विक मंच पर उजागर कर रहे हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के प्रति अपनी अधिकतम दबाव की नीति को फिर से सक्रिय कर दिया है। ट्रम्प ने ईरानी सरकार द्वारा अपने ही नागरिकों पर की जा रही कार्रवाई को अत्यंत क्रूर और अमानवीय करार दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अमेरिका केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि ईरान ने हिंसा बंद नहीं की और अपने परमाणु कार्यक्रम व क्षेत्रीय गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई जैसा कठोर विकल्प भी चुन सकता है। व्हाइट हाउस से आए संकेतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्रम्प प्रशासन किसी भी वार्ता से पहले ज़मीनी बदलाव देखना चाहता है।

इन धमकियों के जवाब में ईरान ने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों रुख अपनाए हैं। अराघची ने कहा कि ईरान युद्ध शुरू करने वाला पहला पक्ष नहीं होगा, लेकिन यदि उस पर हमला हुआ, तो उसकी प्रतिक्रिया अभूतपूर्व और विनाशकारी होगी। उनका दावा है कि ईरान की सैन्य क्षमताएं अब पहले से कहीं अधिक उन्नत हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान बातचीत के पक्ष में है। ईरान की शर्त यह है कि अमेरिका को समानता और आपसी सम्मान का परिचय देना होगा और ईरान की संप्रभुता को चुनौती देना बंद करना होगा। यह स्थिति पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े संकट की ओर ले जा रही है, जहाँ एक छोटी सी गलती बड़े क्षेत्रीय युद्ध का कारण बन सकती है।