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“नई दुल्हन की पहली लोहड़ी: सजने-धजने से लेकर शगुन तक, इन 5 बातों का रखेंगे ध्यान तो यादगार बनेगा त्योहार

लोहड़ी सिख धर्म का काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. हर साल ये त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 13 जनवरी यानी कल मनाया जाएगा. लोहड़ी का पर्व बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है. उत्तर भारत खासकर पंजाब और हरियाणा में ये पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. लोहड़ी प्रमुख रूप से कृषि से जुड़ा त्योहार माना जाता है.

इस समय किसान अपनी रबी की फसल (खासकर गेहूं और सरसों) को काटने की खुशी मनाते हैं. लोहड़ी की अग्नि में नई फसल का भोग लगाते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं. जिस घर में नया विवाह हुआ हो वहां इस त्योहार का महत्व दोगुना हो जाता है. अगर आपकी भी विवाह के बाद यह पहली लोहड़ी है, तो इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें.

लोहड़ी 2026 शुभ मुहूर्त (Lohri 2026 Shubh Muhurat)

हर साल की तरह इस साल भी लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी कल मंगलवार को मनाया जाना वाला है. वहीं, लोहड़ी संक्रांति के क्षण की शुरुआत 14 जनवरी, 2026 को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर होगी. अग्नि प्रज्वलन का शुभ समय शाम 06 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा. ये शुभ समय रात 08 बजकर 30 मिनट तक रहने वाला है.

लोहड़ी पर इन बातों का रखें ध्यान

लोहड़ी के दिन ज्यादा सादे या काले और सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनें. शुभ अवसरों पर काला रंग पहनना वर्जित है. इस दिन पारंपरिक कपड़े जैसे फुलकारी दुपट्टा या भारी सूट पहनें. लोहड़ी की पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली डालें. कई बार लोग अनजाने में मूंगफली या रेवड़ी खाते-खाते उसी बर्तन से अग्नि में चीजें डाल देते हैं. जो चीजें अग्नि में डालनी हैं वो पहले अलग से निकालकर रख लें. उसे जूठा न करें. ऐसा करना अशुभ होता है.

सभी से जो भी उपहार मिले, उसको मुस्कुराकर स्वीकार करें और बड़ों का आशीर्वाद लें. लोहड़ी की अग्नि की परिक्रमा करें. ऐसा करना सौभाग्य और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. लोहड़ी की शाम अग्नि प्रज्वलित करने का समय सबसे मुख्य होता है, उस समय पूजा और आहुति के समय जरूर मौजूद रहें.