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एक साथ 71 आईपीएस अफसरों का तबादला

बिहार पुलिस में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल

  • सुनील और कुंदन: सिस्टम के नए शक्ति केंद्र

  • फील्ड और मुख्यालय में व्यापक उलटफेर

  • फैसले में सरकार का समावेशी रुख स्पष्ट

दीपक नौरंगी

पटनाः बिहार सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही पुलिस प्रशासन की संरचना में अब तक का सबसे व्यापक बदलाव किया है। राज्य के पुलिस महकमे में एक साथ 71 भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों की तैनाती बदलते हुए सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यक्षमता को पूरी तरह से ‘रीसेट’ किया जा रहा है। इस भारी फेरबदल में एडीजी से लेकर डीआईजी और जिलों के पुलिस अधीक्षकों तक को इधर से उधर किया गया है, जो मौजूदा गठबंधन सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी पुलिसिया पुनर्संरचना मानी जा रही है।

इस पूरे फेरबदल की सबसे बड़ी खबर एडीजी स्तर पर हुए बदलाव हैं। 1996 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार, जो अब तक विशेष शाखा में तैनात थे, उन्हें बिहार पुलिस का नया चेहरा बनाते हुए एडीजी मुख्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर, अब तक यह कमान संभाल रहे 1994 बैच के अनुभवी अधिकारी कुंदन कृष्णन को और भी सशक्त भूमिका में भेजा गया है। कुंदन कृष्णन को न केवल डीजी एसटीएफ के रूप में अपग्रेड किया गया है, बल्कि उन्हें विशेष शाखा की भी कमान सौंप दी गई है। अब वे राज्य में खुफिया तंत्र और विशेष ऑपरेशनों के सुपर कमांडर के रूप में उभरे हैं।

सरकार ने उन अधिकारियों पर भी सख्ती दिखाई है जिनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे थे। फील्ड स्तर पर भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, सिवान, और किशनगंज जैसे महत्वपूर्ण जिलों के कप्तानों को बदला गया है। भागलपुर में 2017 बैच के प्रमोद कुमार यादव को नया एसएसपी बनाया गया है, जबकि कांतेश मिश्रा मुजफ्फरपुर और विनीत कुमार छपरा की कमान संभालेंगे। डीआईजी-आईजी स्तर पर भी रंजीत कुमार मिश्रा को आईजी मुख्यालय और सुशांत सरोज को डीआईजी यातायात जैसी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।

महिला अधिकारियों के मामले में भी सरकार ने समावेशी रुख अपनाया है। प्रीता वर्मा और आर. मल्लार विजी जैसी अधिकारियों को ट्रेनिंग और सशस्त्र पुलिस जैसे कोर विंग्स में बड़ी भूमिकाएं दी गई हैं। गौरतलब है कि इस फेरबदल की सटीक संभावना ‘राष्ट्रीय खबर’ ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ही जता दी थी। सुनील कुमार की एडीजी मुख्यालय के रूप में तैनाती की जो भविष्यवाणी की गई थी, उस पर सरकार की आधिकारिक मुहर लगने से मीडिया विश्लेषण की विश्वसनीयता एक बार फिर साबित हुई है।