रायपुर: छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सरकार की इस प्रक्रिया से परेशान शिक्षकों का गुस्सा गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास के बाहर फूट पड़ा. बड़ी संख्या में प्रभावित शिक्षक जनदर्शन में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे. मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्होंने अपनी पीड़ा रखी, जहां उन्हें कार्रवाई का आश्वासन तो मिला, लेकिन बाहर निकलते ही शिक्षकों का दर्द कैमरे के सामने छलक पड़ा.
“सीनियर हटे, जूनियर टिके… नियमों की उड़ाई गई धज्जियां”
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद ईटीवी भारत से खास बातचीत में शिक्षकों ने बताया कि युक्तियुक्तकरण में जमकर अनियमितताएं हुई हैं. किसी ने कहा कि वह सीनियर होने के बावजूद हटा दिए गए और उनकी जगह जूनियर को रख लिया गया. किसी ने आरोप लगाया कि 2008 के सेटअप के नियमों के तहत युक्तियुक्तकरण का दावा किया गया, लेकिन उन्हीं नियमों को ताक पर रख दिया गया.
“शासन-प्रशासन के चक्कर, समिति में सिर्फ धमकी”
प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि वे लगातार शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही. जब अधिकारी कहते हैं समिति के पास जाओ, तो वहां जाने पर डराया-धमकाया जाता है. बिना जांच के आवेदन खारिज कर दिए जा रहे हैं और उनकी पीड़ा को अनसुना किया जा रहा है.
“7 महीने से वेतन नहीं… घर चलाना मुश्किल”
कई शिक्षकों ने बताया कि युक्तियुक्तकरण के बाद से उन्हें 6 से 7 महीने से वेतन नहीं मिला है. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि घर चलाना मुश्किल हो गया है. एक शिक्षक ने कहा कि रिटायरमेंट में सिर्फ ढाई साल बचे हैं, दोनों घुटनों में गंभीर समस्या है, फिर भी उसे हटा दिया गया और जूनियर को रख लिया गया.
“15 साल का संवर्ग एक झटके में बदल दिया”
एक अन्य शिक्षक ने बताया कि 15 साल से वह ई संवर्ग में कार्यरत है, उसी संवर्ग में उसकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन युक्तियुक्तकरण के नाम पर उसका संवर्ग बदलकर टी कर दिया गया. इतना ही नहीं, उसकी पोस्ट को खाली दिखाकर वहां किसी और को नियुक्त कर दिया गया.
“जहां जगह खाली थी, वहां नहीं भेजा… महिलाओं से भी अन्याय”
कुछ महिला शिक्षकों ने बताया कि उनके घर के पास स्कूल में पद खाली होने के बावजूद उन्हें वहां नहीं भेजा गया. जहां भेजा गया, वहां पहले से शिक्षक मौजूद हैं. एक महिला शिक्षक ने कहा कि उनके पति नहीं हैं, वह रायपुर में ही काम करना चाहती थीं, लेकिन जानबूझकर उन्हें दूर भेज दिया गया.
“1500 शिक्षक प्रभावित, 1% स्कूलों से बाहर”
शिक्षकों का दावा है कि इस युक्ति युक्तकरण से करीब 1500 शिक्षक प्रभावित हुए हैं. डेढ़ लाख शिक्षकों में से करीब 1% आज स्कूलों से बाहर हैं. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.
“मौलिक अधिकार छीना गया, अब तो इच्छा मृत्यु दे दो”
शिक्षकों ने कहा कि आज उनके मौलिक अधिकार छीने जा रहे हैं. 6-7 महीने से वेतन नहीं, नौकरी का भरोसा नहीं, हर जगह सिर्फ अपमान और प्रताड़ना.उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए यहां तक कह दिया “इस तरह जीने से अच्छा है सरकार हमें इच्छा मृत्यु का अधिकार ही दे दे, क्योंकि अब हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा है.”