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तुर्कमान गेट पर ‘बुलडोजर एक्शन’: वक्फ बोर्ड की या सरकारी? जानें उस जमीन का असली मालिक कौन जिस पर मचा है बवाल

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में आधी रात को जो बुलडोजर कार्रवाई हुई, उससे राजधानी में उबाल है. अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान वहां माहौल खराब हो गया. वहां मौजूद भीड़ ने पुलिस प्रशासन पर पथराव किया. स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया. बवाल के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल भी हो गए.

इस इलाके में आधी रात को दिल्ली नगर निगम के करीब 20 बुलडोजर चले. इस दौरान पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया था. दरअसल, यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद की गई, जिसमें फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के लगभग 38,940 वर्ग फुट के अवैध अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया था. मगर सवाल यह है कि तुर्कमान गेट में जिस जमीन पर बुलडोजर चले वो किसकी है?

जिस जमीन पर चला बुलडोजर वो किसकी?

दरअसल, मस्जिद 0.195 एकड़ जमीन पर बनी है, जो वैध है. मगर उसके बाहर के निर्माण अवैध हैं क्योंकि मस्जिद कमेटी या दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अतिरिक्त जमीन की वैध मालिकाना हक या कब्जे के दस्तावेज नहीं दिखा सके. याचिकाकर्ता सेव इंडिया फाउंडेशन और एमसीडी का दावा है कि ये जमीन पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और L&DO की है, जो रामलीला मैदान का हिस्सा है. मस्जिद कमेटी इसे वक्फ संपत्ति बताती है.

बुलडोजर एक्शन पर MCD के मेयर ने क्या कहा?

तुर्कमान गेट के पास हुए बुलडोजर एक्शन को लेकर दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर राजा इकबाल ने कहा कि पहले मैं उस जमीन (1940 में लीज पर दी गई) के बारे में बताना चाहता हूं. लगभग 900 स्क्वायर मीटर जगह एलएनडीओ (Land & Development Office) द्वारा एक कब्रिस्तान को दी गई, जिसके पेपर्स कमेटी के पास हैं. समय के साथ उस जगह मस्जिद बन गई. मस्जिद बनने के बाद उसके साथ में एक रामलीला ग्राउंड के अंदर बहुत बड़ी इंक्रोचमेंट की गई. वह अवैध निर्माण था, जिसमें एक बैंक्वेट हॉल चलता था और दूसरी फैसिलिटीज चलती थी.

रामलीला ग्राउंड को क्लियर करवाने का यह मुद्दा हाईकोर्ट में गया. जो उनकी मैनेजमेंट कमेटी थी, उनके लोग भी गए. वह अपने डॉक्यूमेंट के साथ गए और हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि अवैध निर्माण को हटाया जाए और म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने अवैध निर्माण को हटाया. हाई कोर्ट का जो आदेश था, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने उसका पालन किया. कॉर्पोरेशन का काम है अवैध निर्माण को हटाना. आगे से भी जहां पर किसी भी जगह अवैध निर्माण होगा, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऐसे ही काम करती रहेगी.

हमने हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया- मेयर

वहीं, डेमोलिशन ड्राइव को सुबह के बजाए आधी रात में किए जाने पर मेयर ने कहा कि रात-दिन वाली कोई बात नहीं. मुद्दा यह था कि अवैध निर्माण को हटाना, तो अवैध निर्माण को हटा दिया. ड्राइव के दौरान पुलिस कर्मियों पर हुई पत्थरबाजी पर मेयर इकबाल ने कहा कि लोग अपने-अपने लोग एंगल से चीजों को देखते हैं. राजनीतिक दल अपनी-अपनी रोटियां सेकते हैं. मगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का किसी एंगल से कोई मतलब नहीं, हमने हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया.

‘जो अवैध निर्माण था, हमने केवल उसे ही हटाया’

मेयर ने आगे कहा कि डेमोलिशन के दौरान हमने केवल जो अवैध निर्माण था, जहां पर बैंकेट हॉल चल रहा था, केवल उसी को हटाया. हमने किसी भी धार्मिक स्थल को टच नहीं किया. अब ऑलमोस्ट काम हो चुका है. मलबा पड़ा हुआ है. वो मलबा भी वहां से हट जाएगा. लोगों में जो भ्रम फैलाया गया, अफवाह फैलाई गई कि हम जो धार्मिक स्थल है, उसको डेमोलिश करने जा रहे हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है. अब लोगों में शांति है क्योंकि लोगों ने देखा किसी भी तरह का ऐसा काम नहीं किया गया.

यह जमीन वक्फ संपत्ति…दिल्ली वक्फ बोर्ड का दावा

उधर, मस्जिद प्रबंधन समिति और दिल्ली वक्फ बोर्ड ने दावा किया कि यह जमीन वक्फ संपत्ति है और इस पर एक पुराना कब्रिस्तान भी है. उन्होंने अदालत में इस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया और अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 के लिए तय की है. दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. केवल उसके बाहर के अवैध निर्माणों को ढहाया गया है. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी और आप विधायक अमानतुल्ला खान ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे वक्फ भूमि पर अवैध कार्रवाई बताया है और वक्फ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी है.

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई बुलडोजर कार्रवाई

दरअसल, एमसीडी ने यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद की, जिसमें रामलीला मैदान और फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास के लगभग 38,940 वर्ग फुट के अवैध अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया था. 12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने मस्जिद के पास बने हिस्से को अवैध मानते हुए MCD को अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था. हाई कोर्ट ने ये आदेश सेव इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर दिया था. इस मुद्दे पर मंगलवार को भी दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई भी हुई थी. अब अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी.

SO सहित 5 पुलिसकर्मी घायल, उपद्रवियों के खिलाफ FIR

जब आधी रात को MCD की टीम वहां पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने इसका भारी विरोध किया. लोगों को लगा कि मस्जिद को तोड़ा जाएगा. इस कारण भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया. इस दौरान एक एसएचओ सहित कम से कम 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए. इस मामले में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उपद्रवियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.