पुराने सदस्यों का रिपोर्ट कार्ड मांगकर खड़ी की परेशानी
हर रोज चल रही है शानदार पार्टियां
अब तो टीम बनाकर चुनाव लड़े जाते
कुछ लोगों के लिए चेहरा चमकाने वाला
राष्ट्रीय खबर
रांचीः झारखंड की व्यापारिक राजधानी रांची में इन दिनों छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के भावी चुनाव को लेकर सरगर्मियां चरम पर हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, चुनावी समर में उतरे प्रत्याशियों और उनके समर्थक गुटों का जनसंपर्क तथा प्रचार अभियान बेहद तेज हो गया है। चैंबर चुनाव के इस पूरे माहौल में सबसे ज्यादा चर्चा इसके अप्रत्याशित चुनावी खर्च को लेकर हो रही है। जानकारों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर भले ही चुनाव खर्च की एक सीमा तय हो, लेकिन अघोषित रूप से इस संस्था के चुनाव में पानी की तरह पैसा बहाया जाता है। खर्च का यह आंकड़ा इतना विशाल हो जाता है कि कई बार यह विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी द्वारा किए जाने वाले औसतन खर्च को भी पीछे छोड़ देता है।
चुनाव के इस दौर में शहर के कई वर्गों और व्यावसायिक सेवाओं से जुड़े लोगों की मानों ‘लॉटरी’ लग जाती है। मतदान तक हर दिन रांची के किसी न किसी नामचीन या चार-पांच सितारा होटल में प्रत्याशियों अथवा उनके समर्थक समूहों द्वारा भव्य बैठकों, दावतों और पार्टियों का दौर लगातार चलता रहता है। हालांकि, चैंबर जैसी गैर-लाभकारी व्यापारिक संस्था के चुनाव में अचानक बढ़ी इस बेतहाशा आर्थिक अहमियत पर शहर के बुद्धिजीवियों और व्यापार जगत के वरिष्ठ व अनुभवी लोगों ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं होता।
वीडियो में देखें उन्होंने क्या कहा
व्यापारिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा रहती है कि चैंबर का पद हासिल करने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों, मंत्रियों और सरकार में सीधे संपर्क तथा पहचान का बहुत बड़ा फायदा मिलता है। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि पूर्व में कई ऐसे पदाधिकारी रहे हैं, जिन्होंने पद का इस्तेमाल अपने व्यक्तिगत व्यापारिक हितों को साधने और अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए किया।
इसी गहमागहमी के बीच रांची के प्रमुख व्यवसायी एवं रत्न कारोबारी पवन गुप्ता के एक वीडियो संदेश ने चुनावी माहौल में हलचल पैदा कर दी है। उनका परिवार इस संगठन से दशकों से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा रहा है। उन्होंने चैंबर के ढर्रे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कई ऐसे चेहरे हैं जो वर्षों से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। बदले हुए परिवेश में ऐसे पुराने व बार-बार चुने जाने वाले प्रतिनिधियों को अब सदस्यों के सामने अपना ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश करना चाहिए। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले कार्यकालों में उन्होंने व्यापारिक समुदाय और चैंबर के उत्थान के लिए वास्तव में कौन-कौन से ठोस कदम उठाए हैं।
पवन गुप्ता के इस तीखे सवाल ने चुनाव लड़ रहे कई पुराने दिग्गजों को असहज कर दिया है, क्योंकि चैंबर के मंच का इस्तेमाल केवल अपनी राजनीतिक व सामाजिक पहचान चमकाने के लिए करने वालों के पास रिपोर्ट कार्ड के नाम पर अपनी उपलब्धियां दिखाने के लिए कुछ खास मौजूद नहीं है।