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भारतीय अर्थव्यवस्था में पतन को रोक रही हमारी पुरानी परंपरा

देश में मौजूद है पच्चीस हजार टन घरेलू सोना

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हाल ही में जारी एचएफएल कैपिटल की आउटलुक 2026 रिपोर्ट ने इस पारंपरिक सोच को एक ठोस आर्थिक आधार दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास मौजूद लगभग 25,000 टन सोने का भंडार वर्तमान में देश के लिए एक सबसे बड़े आर्थिक झटकों को सोखने वाला के रूप में उभरा है।

इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भारतीय परिवारों के पास संचित इस सोने का कुल बाजार मूल्य अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 80 प्रतिशत के बराबर पहुँच गया है। पिछले एक साल में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में आई भारी उछाल ने इस संपत्ति के मूल्य को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता के बीच, यह विशाल भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था को एक अद्वितीय वित्तीय लचीलापन प्रदान करता है।

केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि सरकारी स्तर पर भी सोने की भूमिका बढ़ी है। वर्ष 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सोने की खरीद में की गई रणनीतिक वृद्धि ने भारतीय रुपये को मजबूती प्रदान की है। विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी ने न केवल मुद्रा के अवमूल्यन को रोका है, बल्कि बाहरी आर्थिक झटकों के खिलाफ देश के संतुलन को भी मजबूत किया है।

रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर इशारा करती है: इस विशाल स्वर्ण भंडार का कौलेटरल (ऋण के लिए जमानत) के रूप में उपयोग अभी भी बहुत कम है। वर्तमान में, अधिकांश सोना सुप्त पूंजी  के रूप में लॉकरों में रखा है। इससे भविष्य में स्वर्ण-समर्थित ऋण के विकास की अपार संभावनाएं हैं। संकट के समय परिवार उच्च-ब्याज वाले असुरक्षित ऋणों के बजाय अपने सोने पर कम ब्याज पर ऋण लेकर अपनी खपत को स्थिर रख सकते हैं। यह सोना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने का एक सुरक्षित जरिया बन सकता है।

संक्षेप में, 25,000 टन का यह घरेलू भंडार भारत की एक अदृश्य शक्ति है। यह न केवल कठिन समय में परिवारों की क्रय शक्ति को बनाए रखता है, बल्कि व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता भी प्रदान करता है। यदि इस सुप्त पूंजी को सही वित्तीय उपकरणों के माध्यम से मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में और अधिक सक्रिय किया जाए, तो यह भारत की विकास दर को नई गति दे सकता है।