जीन थेरेपी को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक कदम
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क्रिस्पर तकनीक का विकास और नई दिशा
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सिकल सेल के उपचार के लिए नई संभावनाएँ
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कैंसर के खतरे को भी कम कर देगा यह
राष्ट्रीय खबर
रांचीः सिडनी के वैज्ञानिकों ने क्रिस्पर तकनीक का एक नया रूप विकसित किया है, जो जीन थेरेपी को न केवल सुरक्षित बना सकता है, बल्कि जीन के यूएनएसडब्ल्यू स्विच ऑफ होने की दशकों पुरानी पहेली को भी सुलझा सकता है। शोध से पता चला है कि डीएनए से जुड़े छोटे रासायनिक संकेतक निष्क्रिय क्षेत्रों में केवल उप-उत्पाद के रूप में मौजूद नहीं रहते, बल्कि वे सक्रिय रूप से जीन को मौन करने का काम करते हैं।
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वर्षों से शोधकर्ता इस बात पर बहस कर रहे थे कि क्या मिथाइल (समूह पर जमा होने वाले सूक्ष्म रासायनिक क्लस्टर) केवल उन जगहों पर दिखाई देते हैं जहाँ जीन पहले से बंद हैं, या वे स्वयं जीन दमन का सीधा कारण हैं। हालिया अध्ययन में, यूएनएसडब्ल्यू और सेंट जूड चिल्ड्रन्स रिसर्च हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने साबित किया कि इन रासायनिक टैग्स को हटाने से जीन फिर से सक्रिय हो जाते हैं। जब इन टैग्स को वापस जोड़ा गया, तो जीन फिर से बंद हो गए। यह परिणाम पुष्टि करता है कि डीएनए मिथाइलेशन सीधे तौर पर जीन गतिविधि को नियंत्रित करता है।
अध्ययन के मुख्य लेखक प्रोफेसर मर्लिन क्रॉस्ली ने इसे समझाते हुए कहा, हमने स्पष्ट रूप से दिखाया कि यदि आप इन मकड़ी के जालों को झाड़ दें, तो जीन चालू हो जाता है। ये यौगिक केवल जाल नहीं हैं, बल्कि ये लंगर की तरह हैं जो जीन को बांधे रखते हैं।
क्रिस्पर (क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट्स) आधुनिक जीन-एडिटिंग का आधार है। पारंपरिक रूप से, यह दोषपूर्ण जेनेटिक कोड को स्वस्थ संस्करणों से बदलने के लिए डीएनए को काटने का काम करता है। हालांकि, डीएनए स्ट्रैंड्स को तोड़ने से अनपेक्षित परिवर्तन और कैंसर जैसे गंभीर दुष्प्रभावों का खतरा बना रहता है।
नवीनतम संस्करण, जिसे एपिजेनेटिक एडिटिंग कहा जाता है, एक अलग दृष्टिकोण अपनाता है। डीएनए को काटने के बजाय, यह कोशिका के केंद्रक के भीतर जीन से जुड़े रासायनिक संकेतकों को लक्षित करता है। शोधकर्ता अंतर्निहित डीएनए अनुक्रम को बदले बिना ही मौन पड़े जीन की गतिविधि को बहाल कर सकते हैं।
यह तकनीक सिकल सेल जैसी वंशानुगत बीमारियों के लिए सुरक्षित उपचार का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। सिकल सेल में लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बिगड़ जाता है, जिससे गंभीर दर्द और अंगों को क्षति पहुँचती है। शोधकर्ताओं का उद्देश्य भ्रूण ग्लोबिन जीन को पुन: सक्रिय करना है, जो जन्म के बाद बंद हो जाता है। यदि इसे सक्रिय कर दिया जाए, तो यह सिकल सेल का कारण बनने वाले दोषपूर्ण वयस्क ग्लोबिन जीन की भरपाई कर सकता है।
प्रोफेसर क्रॉस्ली के अनुसार, डीएनए को काटे बिना जीन थेरेपी करना कैंसर के जोखिम को खत्म करता है। वर्तमान में यह प्रयोग प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं पर किया गया है और भविष्य में इसे पशु मॉडल पर आज़माया जाएगा। यह शोध चिकित्सा और कृषि के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है।
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