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राहुल गांधी के आरोप के बाद मध्यप्रदेश सरकार सक्रिय

10 मौतों के बाद नगर निगम आयुक्त हटाए गए

राष्ट्रीय खबर

भोपालः भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण फैली त्रासदी ने गंभीर रूप ले लिया है। इस घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जिसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासनिक सर्जरी की है। शुक्रवार को इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया गया और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा, जल वितरण विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री प्रदीप निगम को भी पदमुक्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

यह त्रासदी 29 दिसंबर को शुरू हुई थी, जब भागीरथपुरा के निवासियों ने उल्टी, दस्त और तेज बुखार की शिकायत की। जांच में सामने आया कि एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में रिसाव था, जिसके ऊपर शौचालय का निर्माण कर दिया गया था। इसी रिसाव के कारण सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। लैब टेस्ट में पानी के नमूनों में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। हालांकि, सरकार ने हाई कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में केवल चार मौतों की पुष्टि की है, लेकिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आधिकारिक तौर पर 10 मौतों की जानकारी साझा की है। वर्तमान में 200 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 की हालत नाजुक होने के कारण वे आईसीयू में हैं।

भागीरथपुरा में इस समय मातम और दहशत का माहौल है। 68 वर्षीय गीताबाई ध्रुवकर जैसी कई दुखद कहानियां सामने आई हैं, जिनकी मृत्यु शुक्रवार को इलाज के दौरान हो गई। नगर निगम अब इलाके में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति कर रहा है और पाइपलाइन की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को नल का पानी न पीने और पानी उबालकर इस्तेमाल करने की हिदायत दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके।