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मतदाता सूची का पुनरीक्षण का काम ग्यारह राज्यों में

प्रारंभिक सूची में 3.67 करोड़ नाम हटाए गए

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर 2.0) के दूसरे दौर के बाद 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 3.67 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 10 फीसद है। नाम हटाने के मुख्य कारणों में मतदाता की मृत्यु, पते में बदलाव (शिफ्टिंग) या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण होना शामिल है। उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट सूची 31 दिसंबर को जारी की जाएगी, जो इस अभियान का अंतिम हिस्सा होगा।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि तमिलनाडु में सबसे अधिक 97.37 लाख नाम हटाए गए हैं, जो वहां की कुल मतदाता संख्या का 15.19 फीसद है। इसके बाद गुजरात का नंबर आता है, जहां 14.5 फीसद मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक 20.62 फीसद की कमी देखी गई। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए नामों में 99.81 लाख मृत मतदाता थे, जबकि 2.47 करोड़ लोग दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित हो गए थे। करीब 18.60 लाख लोग ऐसे थे जिनका नाम एक से अधिक मतदान केंद्रों पर दर्ज था।

चुनाव आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि जिन वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से कट गए हैं, वे 22 जनवरी तक दावा और आपत्ति चरण के दौरान उचित फॉर्म भरकर अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं। बिहार में हुए पहले चरण के पुनरीक्षण में भी लगभग 65 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से बाद में सुधार के बाद कुछ नाम जोड़े गए। इस कवायद का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और एक मतदाता, एक पहचान के सिद्धांत को पुख्ता करना है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी 7 से 8 प्रतिशत के बीच नाम हटाए गए हैं।