Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
लुधियाना के सिविल लाइंस में मोबाइल टावर से महंगे कार्ड चोरी: सतलुज टावर की छत पर BTS बॉक्स काटकर वार... गुरदासपुर में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त: सड़कों पर कई फीट पानी भरा, घरों में घुसा पानी; ड्रेन... लुधियाना रेलवे स्टेशन री-डेवलपमेंट: 528.95 करोड़ के प्रोजेक्ट की डेडलाइन फिर बढ़ी, अब जून 2027 तक हो... बकाया बिजली बिलों पर विभाग का सख्त रुख, डिफॉल्टरों के कनेक्शन काटने की मुहिम शुरू हांसी के बॉक्सर नरेंद्र बेरवाल को मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड: किसान के बेटे ने तानों से लेकर पदकों तक तय क... कुरुक्षेत्र में वकील के घर ₹3.15 करोड़ की डकैती: CIA-1 और बदमाशों के बीच मुठभेड़, पैर में गोली लगने ... पूर्व अग्निवीरों के लिए हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों में 20% तक क्षैतिज आरक्षण हरियाणा में नाती-नातिन को संपत्ति ट्रांसफर पर स्टाम्प शुल्क में 100% छूट: सरकार ने 2014 की अधिसूचना ... चरखी दादरी के कसानी गांव के लाल रवि प्रकाश बेंगलुरु में शहीद, पूरे गांव में शोक की लहर पंचकूला में HKRN दफ्तर के बाहर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, कर्मचारियों को पक्का करने की मांग

मतदाता सूची का पुनरीक्षण का काम ग्यारह राज्यों में

प्रारंभिक सूची में 3.67 करोड़ नाम हटाए गए

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर 2.0) के दूसरे दौर के बाद 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 3.67 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 10 फीसद है। नाम हटाने के मुख्य कारणों में मतदाता की मृत्यु, पते में बदलाव (शिफ्टिंग) या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण होना शामिल है। उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट सूची 31 दिसंबर को जारी की जाएगी, जो इस अभियान का अंतिम हिस्सा होगा।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि तमिलनाडु में सबसे अधिक 97.37 लाख नाम हटाए गए हैं, जो वहां की कुल मतदाता संख्या का 15.19 फीसद है। इसके बाद गुजरात का नंबर आता है, जहां 14.5 फीसद मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे अधिक 20.62 फीसद की कमी देखी गई। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए नामों में 99.81 लाख मृत मतदाता थे, जबकि 2.47 करोड़ लोग दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित हो गए थे। करीब 18.60 लाख लोग ऐसे थे जिनका नाम एक से अधिक मतदान केंद्रों पर दर्ज था।

चुनाव आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि जिन वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से कट गए हैं, वे 22 जनवरी तक दावा और आपत्ति चरण के दौरान उचित फॉर्म भरकर अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं। बिहार में हुए पहले चरण के पुनरीक्षण में भी लगभग 65 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से बाद में सुधार के बाद कुछ नाम जोड़े गए। इस कवायद का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और एक मतदाता, एक पहचान के सिद्धांत को पुख्ता करना है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी 7 से 8 प्रतिशत के बीच नाम हटाए गए हैं।