Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
उत्तर कोरिया और चीन संबंध मजबूत करेंगे रूसी कब्जे वाले इलाकों पर यूक्रेन का ड्रोन हमला तेज ब्रसेल्स में युवाओं का प्रदर्शन फिर हिंसक हुआ राज्यसभा चुनाव में तेज हुआ जोड़ घटाव का खेल Solar Power Plant in Sitapur: रक्षा भूमि पर देश का पहला बड़ा सोलर प्रोजेक्ट; राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी Yamuna O-Zone Delhi: यमुना किनारे रहने वालों को बड़ी राहत; बीजेपी सांसदों ने कहा- 'पुरानी बस्तियों पर... PM Modi Historic Record: पीएम मोदी बने देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री; नेहरू का रिकॉ... INDIA Alliance Meeting: गठबंधन का पीएम चेहरा तय करने की मांग; संजय राउत बोले- 'अगर मोदी बन सकते हैं ... Bihar Industrial Policy: बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान; 30 दिनों में नहीं मिली मंजूरी तो आवेदन होग... MP Rajya Sabha Election: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; मध्य प्रदेश की तीनों सीटों पर BJP की जीत प...

तमिलनाडु की सूची से 90 लाख से अधिक नाम हटाए गए

चुनाव आयोग ने दूसरे पुनरीक्षण के बाद अपनी वोटर सूची जारी की

राष्ट्रीय खबर

चेन्नई: भारतीय निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। इस विशेष गहन संशोधन के पहले चरण के जो परिणाम सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच बड़ी हलचल पैदा कर दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अकेले तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में डेढ़ करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम प्राथमिक ड्राफ्ट रोल से हटा दिए गए हैं।

तमिलनाडु में निर्वाचन अधिकारियों ने पुष्टि की है कि शुद्धिकरण प्रक्रिया के पहले चरण के दौरान कुल 9,737,832 (लगभग 97.3 लाख) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। आयोग का तर्क है कि एक सटीक मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की नींव होती है। सूची से नाम हटाए जाने के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण बताए गए हैं।

उन मतदाताओं के नाम हटाना जो अब जीवित नहीं हैं लेकिन सूची में बने हुए थे। ऐसे मतदाता जो अब अपने पंजीकृत पते पर नहीं रहते और दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में जा चुके हैं। तकनीक की मदद से उन नामों की पहचान की गई जो एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे। तकनीकी त्रुटियों या गलत जानकारी के आधार पर बने मतदाता पहचान पत्र।

इसी प्रकार की स्थिति पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिली है, जहाँ पहले चरण में 58 लाख से अधिक नामों को सूची से बाहर कर दिया गया है। बंगाल में यह प्रक्रिया अधिक तकनीकी और विस्तृत है। यहाँ कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 92.4 प्रतिशत डेटा को डिजिटल रूप दिया जा चुका है।

अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण चुनौती का भी उल्लेख किया है। लगभग 31,38,374 मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनका विवरण वर्ष 2002 की ऐतिहासिक मतदाता सूची से मेल नहीं खा सका है। निर्वाचन आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए इन मतदाताओं के लिए विशेष सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह सत्यापन प्रक्रिया आज से शुरू होकर 7 फरवरी, 2026 तक जारी रहेगी, ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक का नाम गलती से न कटे।

बड़े पैमाने पर हो रही इन कटौतियों को देखते हुए, निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी मतदाता स्थिति की तुरंत जांच करें। नाम गायब होने की स्थिति में घबराने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना ईपीआईसी नंबर या व्यक्तिगत विवरण डालकर नाम खोजें।

आप अपने स्मार्टफोन पर आधिकारिक ऐप के माध्यम से भी अपनी पात्रता देख सकते हैं। यदि आपका नाम सूची में नहीं है, तो आप दावे और आपत्तियों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर पुन: आवेदन कर सकते हैं। यह वृहत अभ्यास न केवल चुनावी धोखाधड़ी को रोकेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि केवल पात्र मतदाता ही देश के भविष्य को चुनने में अपनी भूमिका निभाएं।