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उग्र भीड़ ने भाजपा नेता के घर में आग लगा दी

असम के कार्बी आंगलोंग में भड़की हिंसा

  • प्रदर्शन के दौरान आगजनी, पुलिस ने की फायरिंग

  • सुरक्षा बल के जवान और चार लोग घायल हो गये

  • दो जिलों में रात्रिकालीन कर्फ्यू लागू किया गया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम के पहाड़ी जिलों, कार्बी आंगलांग और पश्चिम कार्बी आंगलांग में पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है और प्रभावित क्षेत्रों में रात्रिकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह पूरा विवाद जनजातीय समुदायों के लिए आरक्षित जमीनों पर अवैध कब्जे को लेकर शुरू हुआ है, जो अब एक बड़े कानून-व्यवस्था के संकट में बदल गया है।

विवाद का केंद्र खेरोनी इलाका है, जहाँ स्थानीय प्रदर्शनकारी पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनकी मुख्य मांग विलेज ग्रेजिंग रिजर्व और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व भूमि से उन लोगों को हटाना है, जिन्हें वे बाहरी और अवैध कब्जाधारी मान रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्वायत्त परिषद की अनदेखी के कारण संरक्षित चारागाह भूमियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है। रविवार को जब पुलिस ने आंदोलन के प्रमुख नेता लित्सोंग रोंगफार सहित 9 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, तो समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा।

सोमवार की सुबह उग्र भीड़ डोंगकामोकाम में एकत्र हुई, जो कार्बी आंगलांग ऑटोनॉमस काउंसिल के मुख्य कार्यकारी सदस्य और भाजपा नेता तुलिराम रोंगहांग का निर्वाचन क्षेत्र है। भीड़ ने रोंगहांग के आवास पर हमला कर दिया और वहां तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इस संघर्ष में चार प्रदर्शनकारी गोली लगने से घायल हो गए, जबकि उग्र भीड़ के पथराव में असम पुलिस और सीआरपीएफ के कई जवान भी जख्मी हुए हैं। फिलहाल पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार भावनाओं को समझती है, लेकिन प्रशासन गुवाहाटी उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के कारण फिलहाल अतिक्रमण हटाने की स्थिति में नहीं है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पड़ोसी देश बांग्लादेश की अस्थिरता पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और वहां के कट्टरपंथी तत्वों द्वारा पूर्वोत्तर भारत को बांग्लादेश में मिलाने के भड़काऊ बयान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इसके मद्देनजर असम-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की घुसपैठ या अप्रिय घटना को रोका जा सके।