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असम में हिंसा और घुसपैठ का दोहरा संकट

कार्बी आंगलोंग में आगजनी और सीमा पर बांग्लादेशी गिरफ्तार

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम के पर्वतीय जिले कार्बी आंगलोंग में पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव ने बुधवार को हिंसक रूप ले लिया। संरक्षित चराई भूमि से अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन सांप्रदायिक झड़पों में तब्दील हो गया, जिससे पूरा क्षेत्र सुलग उठा। इस भीषण हिंसा में अब तक दो नागरिकों की जान जा चुकी है और सुरक्षाकर्मियों सहित दर्जनों लोग घायल हैं।

हिंसा की सबसे हृदयविदारक घटना खेरोनी बाजार क्षेत्र में घटी, जहाँ प्रदर्शनकारियों द्वारा दुकानों और इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। इस आगजनी में 32 वर्षीय दिव्यांग युवक, सूरज डे अपनी दुकान के भीतर ही फंस गया। शारीरिक अक्षमता के कारण वह समय रहते बाहर नहीं निकल सका और जिंदा जल जाने से उसकी दुखद मृत्यु हो गई। एक अन्य व्यक्ति, अथिक तिमुंग की भी इन झड़पों के दौरान मौत की पुष्टि हुई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन मौतों पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान कम से कम 38 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि कुल घायलों की संख्या 100 के पार पहुँच गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सीआरपीएफ की 50 कंपनियां तैनात की हैं। पुलिस महानिदेशक हरमीत सिंह ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने बातचीत का आश्वासन देने के बावजूद बमबाजी और तीर-कमान से हमले किए। वर्तमान में भारी सुरक्षा बलों की उपस्थिति के कारण तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन होजई-कार्बी आंगलोंग सीमा पर विरोध प्रदर्शन अब भी जारी हैं।

इसी अशांति के बीच, असम के श्रीभूमि जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई है। ग्राम रक्षा दल की मदद से सात बांग्लादेशी नागरिकों को फिर से हिरासत में लिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी सात सदस्यीय समूह को भारतीय अधिकारियों ने 19 दिसंबर को ही वापस बांग्लादेश डिपोर्ट किया था। मात्र पांच दिनों के भीतर उसी समूह का दोबारा सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस आना सीमा सुरक्षा बल (BSF) की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासियों में इस बार-बार होने वाली घुसपैठ को लेकर गहरा रोष है।