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भारत-भूटान सीमा के पास हिंसा के बाद जिले भर में सुरक्षा बढ़ा दी गई

वन कार्यालय में आगजनी में 15 गिरफ्तार

  • चिरांग, कोकराझाड़ में इंटरनेट सेवा निलंबित

  • प्रक्रियागत गलतियों की ओर इशारा किया

  • मणिपुर में भीड़ पर आंसू गैस छोड़े गये

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: उत्तर-पूर्व के तीन राज्यों—असम, बीटीसी क्षेत्र और मणिपुर—में पिछले 48 घंटों के दौरान हिंसा, सड़क हादसों और विरोध प्रदर्शनों के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।

भारत-भूटान सीमा के पास चिरांग जिले में रिपू-चिरांग आरक्षित वन से अतिक्रमणकारियों को हिरासत में लेने के बाद हिंसा भड़क उठी। शुक्रवार सुबह डंडों से लैस भीड़ ने रानीखाटा स्थित वन विभाग के कार्यालय और आवासीय क्वार्टरों पर हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी वाहनों में आग लगा दी और वन रक्षकों से हथियार छीनने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। तनाव देखते हुए चिरांग और कोकराझाड़ जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर धारा 163 लागू कर दी गई है। बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) के प्रमुख हग्रामा मोहिलरी ने घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और बेदखली अभियान की प्रक्रियात्मक जांच की बात कही है।

असम के ही काकोपाथर इलाके में शुक्रवार रात बिहू उत्सव के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। एक तेज़ रफ्तार और अनियंत्रित बोलेरो ने सड़क किनारे खड़े दो युवकों—प्रणजीत दास और शशांक मोरन—को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने शनिवार सुबह नेशनल हाईवे 15 को जाम कर दिया और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मृतक परिवारों के लिए मुआवजे और आरोपी ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल आरोपी ड्राइवर पुलिस हिरासत में है।

मणिपुर के इंफाल ईस्ट में 18 अप्रैल को स्थिति तब बिगड़ गई जब सुरक्षा बलों ने खুরई लामलोंग में निकाली गई एक मशाल रैली को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। यह रैली बिष्णुपुर में हुए बम धमाके के विरोध में आयोजित की गई थी, जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने केंद्रीय बलों के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी जमीन की रक्षा का संकल्प लिया। राज्य के विभिन्न हिस्सों में दिन में धरना और रात में मशाल जुलूसों का सिलसिला जारी है, जिससे प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।