सोलर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाओँ पर रोक लगी
गृह मंत्रालय का नया आदेश जारी हुआ
सभी सीमाओँ के लिए यह प्रतिबंध लागू
विदेशी मजदूरों पर भी रोक लगायी गयी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की संवेदनशीलता को सबसे ऊपर रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से नियंत्रण रेखा, वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के ठीक एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की नई सोलर (सौर), पवन (विंड) या हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। रणनीतिक रूप से संवेदनशील इन इलाकों में इस तरह की परियोजनाओं के निर्माण पर रोक लगाने से संभावित सुरक्षा जोखिमों को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकेगा।
गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा प्रभाग द्वारा जारी किए गए इन नए और कड़े दिशानिर्देशों के दायरे में केवल परियोजनाओं की स्थापना ही नहीं, बल्कि उनकी कार्यप्रणाली और कार्यबल से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, इन सीमावर्ती क्षेत्रों में इन ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन, रख-रखाव और संचालन के लिए भारत के साथ थल सीमा साझा करने वाले पड़ोसी देशों—विशेष रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन—के इंजीनियरों, तकनीकी स्टाफ, कर्मचारियों और मजदूरों को काम पर रखने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में इन देशों के किसी नागरिक या कर्मी को इन परियोजनाओं में शामिल करना अनिवार्य हो, तो उसके लिए संबंधित कंपनियों या ठेकेदारों को केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने के लिए गृह मंत्रालय ने इसी निर्देश के तहत एक और बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने नियंत्रण रेखा, वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे 50 किलोमीटर के पूरे दायरे में आने वाले सभी क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के सीमावर्ती और दूरदराज के इलाकों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का दायरा काफी तेजी से बढ़ा है, जिसमें कई विदेशी कंपनियों और कर्मियों की संलिप्तता की भी संभावना रहती है। ऐसे में, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक हितों से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में इस तरह की सख्त पाबंदियां लगाना देश की रक्षा व्यवस्था और खुफिया सुरक्षा के लिहाज से एक अत्यंत आवश्यक और दूरदर्शी कदम है।