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बिष्णुपुर के इलाके में गोली चालन के बाद एलर्ट

चंद दिनों की शांति के बाद फिर हिंसा, विस्थापितों में खौफ

  • रात को अचानक गोलियां चलने लगी

  • अपना घर छोड़कर निकल भागे लोग

  • सुरक्षा समीक्षा के ठीक बाद हुई हिंसा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः मणिपुर का बिष्णुपुर जिला एक बार फिर गोलियों की गूँज से दहल उठा है। मंगलवार, 17 दिसंबर की रात चुराचांदपुर जिले की सीमा से सटे तोरबुंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों में अज्ञात हमलावरों द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

स्थानीय सूत्रों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गोलीबारी रात करीब 9 बजे शुरू हुई। हमलावरों ने कई राउंड फायर किए, जिससे सीमावर्ती बस्तियों में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर रवाना किया गया। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और रात के बाद से गोलीबारी की कोई नई घटना सामने नहीं आई है। एहतियात के तौर पर संवेदनशील बाहरी इलाकों में अतिरिक्त चौकसी बढ़ा दी गई है और हमलावरों की पहचान के लिए जांच जारी है।

यह घटना उन परिवारों के लिए विशेष रूप से हृदयविदारक रही जो लंबे समय बाद अपने घरों को लौटे थे। तोरबुंग और फौगाकचाओ इखाई वही क्षेत्र हैं जहाँ 3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा की पहली चिंगारी भड़की थी। लगभग दो साल तक राहत शिविरों में रहने के बाद, हाल ही में कई महिलाएं और बच्चे अपने घरों को वापस लौटे थे। लेकिन इस ताजा गोलीबारी ने पुराने जख्मों को हरा कर दिया है, जिससे डरे-सहमे ग्रामीण एक बार फिर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

हैरानी की बात यह है कि यह हिंसा पुलिस महानिदेशक राजीव सिंह के चुराचांदपुर दौरे के कुछ ही घंटों बाद हुई। डीजीपी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की थी, जिसमें क्षेत्र की सुरक्षा तैयारियों और मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन किया गया था। इस उच्च-स्तरीय बैठक के तुरंत बाद हुई गोलीबारी ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। वर्तमान में सुरक्षा बल ड्रोन और तलाशी अभियानों के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, ताकि शांति व्यवस्था बहाल रखी जा सके।