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सोमनाथ मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर रक्षा मंत्री का बयान

कांग्रेस ने राजनाथ पर गलतबयानी का आरोप लगाया

  • नेहरू की मंशा पर उठाया था सवाल

  • भाजपा इतिहास पर भी झूठ फैलाती है

  • पंडित जी सच्चे धर्म निरपेक्ष नेता थे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान, जिसमें उन्होंने बाबरी मस्जिद को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं, ने भारतीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान के बाद, मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और राजनाथ सिंह पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया।

कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू ने, धर्मनिरपेक्षता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखते हुए भी, देश की सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया था। उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का समर्थन किया था, लेकिन साथ ही उन्होंने सरकारी मशीनरी को धार्मिक आयोजनों से दूर रखने की अपनी सैद्धांतिक स्थिति पर भी कायम रहे। यह ऐतिहासिक संदर्भ कांग्रेस द्वारा भाजपा के चुनिंदा इतिहासवाद को चुनौती देने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने कहा कि भाजपा जानबूझकर ऐतिहासिक घटनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए विकृत कर रही है। उनका दावा है कि नेहरू हमेशा देश की सभी संस्कृतियों के प्रति सम्मानजनक रहे, भले ही उन्होंने राज्य और धर्म के अलगाव के सिद्धांतों का सख्ती से पालन किया।

यह राजनीतिक बयानबाजी आने वाले समय में कई और गरमागरम बहसों को जन्म दे सकती है, खासकर ऐसे समय में जब देश के कई हिस्सों में विधानसभा चुनाव आसन्न हैं। दोनों ही दल इस मुद्दे को अपनी-अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यह मामला और भी अधिक पेचीदा हो गया है। राजनाथ सिंह और कांग्रेस के बीच का यह वैचारिक मतभेद, भारत के राजनीतिक विमर्श में धर्म और इतिहास की भूमिका को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।