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देश में बढ़ते नये किस्म के अपराध पर शीर्ष अदालत सख्त

डिजिटल अरेस्ट स्कैम की सीबीआई जांच निर्देश

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी के मामलों की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आदेश दिया कि सीबीआई सबसे पहले डिजिटल अरेस्ट घोटालों से संबंधित मामलों की जांच करेगी, जबकि साइबर अपराध की अन्य श्रेणियाँ बाद के चरणों में ली जाएंगी। न्यायालय ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के मामले प्रमुख जांच एजेंसी के तत्काल ध्यान की मांग करते हैं।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में धोखेबाज पीड़ित को गिरफ्तारी की धमकी देते हैं, अक्सर सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाई कोर्ट, सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय जैसे सरकारी अधिकारियों या एजेंसियों के रूप में पेश आते हैं, और फिर उन्हें ऑनलाइन या वीडियो कॉल पर पुलिस हिरासत में होने का ढोंग करवाते हैं। पीड़ितों से फिरौती या जुर्माने के नाम पर बड़ी रकम ऐंठ ली जाती है, जिसे अक्सर म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से निकाला जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को इस जांच में खुली छूट दी है। जिसमें बैंक खातों के लिए प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत बैंकरों की कथित भूमिका की जांच भी शामिल है। न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक को यह पता लगाने में सहायता करने का निर्देश दिया है कि संदिग्ध खातों की पहचान करने और अपराध की आय को फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या मशीन लर्निंग को कैसे लागू किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने उन राज्यों को भी सहमति देने का आदेश दिया है जिन्होंने अभी तक सीबीआई को जांच के लिए सामान्य सहमति नहीं दी है, ताकि एजेंसी अखिल भारतीय स्तर पर कार्रवाई कर सके। अपराधों की व्यापकता और भारत के क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार से परे उनके विस्तार को देखते हुए, सीबीआई को आवश्यकता पड़ने पर इंटरपोल से सहायता मांगने का भी निर्देश दिया गया है।