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लेबर कोड पर शिवसेना (UBT) ने किया विरोध! अरविंद सावंत बोले- ‘यह मजदूरों के लिए काला कानून है’, खत्म हो जाएंगे उनके अधिकार

केंद्र सरकार की ओर लागू किए गए चार श्रम कानूनों का विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है. कांग्रेस ने जहां इसे वापस लेने की मांग कर रही है तो वहीं शिवसेना (UBT) भी इसके विरोध में है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना का कहना है कि केंद्र के नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकार को खत्म कर देंगे. इस वजह से अनिश्चितता की स्थिति बनी रहेगी.

शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने आज शनिवार को केंद्र के चार नए लेबर कोड को लागू करने की आलोचना करते हुए कहा कि ये मजदूरों के अधिकार खत्म कर देंगे और ये अनिश्चितता पैदा करेंगे. शिवसेना (UBT) वर्कर्स विंग के प्रमुख सावंत ने केंद्र सरकार पर कैपिटलिस्ट और अमीरों के साथ मिलने का आरोप लगाया.

नए कोड को कोर्ट में चुनौती देंगेः सावंत

उन्होंने कहा कि कानून ने हर चीज को निश्चितता से अनिश्चितता में बदल कर रख दिया है. साथ ही यह कहा कि नए कोड को कोर्ट में चुनौती भी दी जाएगी.

केंद्र सरकार ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020, द ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020, और कोड ऑन वेजेज 2019 को नोटिफाई किया है, और ये कानून साल 2020 से ही पेंडिंग थे, और इसमें कई बड़े सुधार किए गए हैं.

MVA सरकार के समय भी किया था विरोधः सावंत

सावंत ने नए कोड पर निराशा जाहिर करते हुए कहा, “ये कोड मजदूरों की जिंदगी बर्बाद कर देंगे और उन्हें कोई खास अधिकार भी नहीं देंगे. भारतीय कामगार सेना इन कनूनों को लागू करने का विरोध करेगी.” उन्होंने कहा कि पहले के कानून के तहत, 100 मजदूरों को काम पर रखने वाले किसी भी फैक्ट्री मालिक को अपनी यूनिट बंद करने के लिए राज्य सरकार से इजाजत लेनी पड़ती थी, लेकिन नए कोड ने यह संख्या बढ़ाकर 300 तक कर दी गई है.

शिवसेना नेता सावंत ने आगे कहा कि जब उद्धव ठाकरे की महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार सत्ता में थी, तो उन्होंने राज्य में इन कोड को लागू करने के किसी भी कदम का कड़ा विरोध जताया था.

श्रम कानून वापस लिए जाएंः कांग्रेस

इससे पहले कांग्रेस ने भी श्रम कानूनों के विरोध में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही लागू चार श्रम कानूनों को तत्काल वापस लिया जाए क्योंकि ये मजदूर विरोधी होने के साथ बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा देने वाली हैं. पार्टी के असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस प्रकोष्ठ के अध्यक्ष उदित राज ने दावा किया कि सरकार ने एक झटके में उन सभी कानूनों की हत्या कर दी, जो पहले से मजदूरों के हित में मौजूद थे.

केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते चार कोड लागू किए, जिसमें सभी के लिए समय पर मिनिमम वेज और यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी जैसे मजदूरों के लिए सुधारवादी व्यवस्था की गई पेश किए गए. नए कानूनों में काम के घंटे बढ़ाने और ज्यादा फिक्स्ड-टर्म रोजगार से जुड़े नियम शामिल किए गए हैं. इन कोड के जरिए 29 बिखरे कानूनों को एक साथ लाया गया है.