भारत निर्वाचन आयोग ने प्रेस कांफ्रेंस में दी जानकारी
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पहले चरण का काम पूरा हो चुका है
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प्रशिक्षण सत्र भी इसमें शामिल है
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अभी इन राज्यों में 51 करोड़ वोटर है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत निर्वाचन आयोग ने 28 अक्टूबर, 2025 से शुरू होने वाले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है। यह एक महत्वपूर्ण कवायद है जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन, त्रुटिहीन और समावेशी बनाना है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अपने अधिकार से वंचित न रह जाए।
जिन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होगा, वे हैं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप।
इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का विस्तृत कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के दो दिवसीय सम्मेलन (जो 23 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ) में साझा किया गया। सीईओ सम्मेलन में चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय एसआईआर के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों का जायजा लिया था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि जिन 12 राज्यों में एसआईआर हो रहा है, वहाँ लगभग 51 करोड़ मतदाता हैं। इस व्यापक कार्य के लिए कुल 5.33 लाख बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को लगाया जाएगा, साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 7 लाख से ज़्यादा बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) भी इस प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
गणना प्रपत्रों की छपाई और प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक। घर-घर जाकर गणना 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक। इस दौरान बीएलओ घर-घर जाकर जानकारी सत्यापित करेंगे। मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशन 8 दिसंबर, 2025 को। मसौदे के प्रकाशन के बाद आम जनता इसे देख सकेगी। 9 दिसंबर, 2025 से 8 जनवरी, 2026 तक। इस अवधि में नागरिक नए नाम जोड़ने, हटाने या किसी त्रुटि को ठीक करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। नोटिसों पर सुनवाई 31 जनवरी, 2026 तक। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 फरवरी, 2026 को।
निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि असम में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की घोषणा अलग से की जाएगी। हालांकि असम में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन राज्य को इस चरण के एसआईआर में शामिल नहीं किया गया है। यह विशेष गहन पुनरीक्षण आगामी चुनावों की तैयारियों के लिए एक मौलिक और आवश्यक कदम है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करता है।