फ्रांस में कैबिनेट के बाद भी राजनीतिक उथलपुथल
पेरिसः फ्रांस में राजनीतिक उथल-पुथल का एक नया दौर तब शुरू हुआ जब प्रधान मंत्री सेबस्टियन लेकोर्नू ने अपनी नई कैबिनेट की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। लेकोर्नू का कार्यकाल 27 दिन से भी कम समय का रहा, जिससे वह आधुनिक फ्रांसीसी इतिहास में सबसे कम समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक बन गए।
यह इस्तीफा मैक्रॉन के लिए एक बड़ा झटका है, जो 2022 से राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं। यह संकट तब शुरू हुआ जब उनकी पार्टी ने संसद में अपना पूर्ण बहुमत खो दिया, जिससे उन्हें विधायी एजेंडे को लागू करने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकोर्नू को मैक्रॉन ने संसद और जनता दोनों के बीच व्यापक आलोचना के बीच एक नई दिशा देने और देश में बढ़ते सामाजिक तनाव को शांत करने के उद्देश्य से नियुक्त किया था।
लेकोर्नू के इस्तीफे के पीछे की तात्कालिक वजह नई कैबिनेट के गठन के तरीके को लेकर व्यापक असंतोष और विरोध माना जा रहा है। फ्रांस में कई लोगों का मानना था कि कैबिनेट में प्रमुख पदों पर जो नियुक्तियां की गईं, वे देश की मौजूदा समस्याओं का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं। विशेष रूप से, नई कैबिनेट पर मैक्रॉन के विरोधियों ने ‘बदलाव की कमी’ और ‘पुराने चेहरों’ को फिर से लाने का आरोप लगाया था।
लेकोर्नू के अचानक इस्तीफे ने अब राष्ट्रपति मैक्रॉन पर संसदीय चुनाव कराने का दबाव बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मैक्रॉन के पास अब कुछ सीमित विकल्प हैं: या तो वह तुरंत किसी नए प्रधान मंत्री को नियुक्त करें, जो विभाजित संसद में विश्वास मत हासिल कर सके, या फिर वह समय से पहले संसदीय चुनाव बुलाएँ। चुनाव बुलाने का जोखिम यह है कि इससे उनकी पार्टी को और भी सीटें गंवानी पड़ सकती हैं, जिससे उनकी शेष अध्यक्षता में उनका शासन और भी कमजोर हो जाएगा।
यह राजनीतिक संकट फ्रांस में सामाजिक अशांति, आर्थिक चुनौतियों और यूरोप में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय आया है, जिससे देश में नेतृत्व की कमी की चिंताएँ बढ़ गई हैं। पेरिस में राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है, और अगले प्रधान मंत्री का चुनाव मैक्रॉन की अध्यक्षता के शेष कार्यकाल की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।