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हम तेरे बिन अब रह .. .. .. ..

हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते, जैसा सीन कुछ इंडियन पॉलिटिक्स में भी हो चला है। इसके सेंटर में अब चुनाव आयोग है, जिसे दोनों तरफ के प्रतिद्वंद्वियों ने पंच बैग बनाकर रख दिया है। वोट काटा तो वह जिम्मेदार और वोट जोड़ा तो भी वह जिम्मेदार। कांग्रेस के राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा का विश्लेषण क्या किया, जांच की बाढ़ आ गयी।

हर तरफ से हार जीत के अंतर और वोट के जोड़-तोड़ का गणित सुलझाने लगे लोग। पेंच ऐसा फंसा है कि अब सफाई देने से भी काम नहीं चल रहा है और हर सफाई के साथ साथ नये सवाल खड़े हो रहे हैं। वइसे एगो कंफ्यूजन है कि आखिर पहले वाले मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार कहां हैं। एक नेता ने कहा कि वह विदेश भाग गये हैं तो सूत्रों के हवाले से खबर आयी कि वह भारत में ही है।

उन्होंने रिटायर होने के पहले ऐसा कहा था कि वह हिमालय के इलाकों में रहना चाहते हैं और एकांतवास से खुद को आनंदित महसूस करेंगे। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी सवालों के घेरे में आये पूर्व अधिकारी का अब तक जनता के सामने नहीं आना भी नये सवाल खड़े करता है। कहीं भाई साहब वाकई नीरव मोदी या मेहूल चौकसे की राह पर तो नहीं चले गये हैं।

राहुल गांधी ने पहले एटम बम फोड़ा है और बाद में हाइड्रोजन बम फोड़ने की बात कही है।  उसके पहले प्रेस कांफ्रेंस का नतीजा यह हुआ कि बिहार के एसआईआर का भाई लोगों ने अइसा पोस्टमार्टम कर दिया कि बेचारा चुनाव आयोग फिर से सहमा हुआ है। उसे यह बताने में दिक्कत हो रही है कि एक ही घर में एक हजार मतदाता कैसे रह सकते हैं। जिनलोगों तो आयोग ने मृत बताया था, उसमें से अनेक लोग तो नेता प्रतिपक्ष के साथ चाय पीते नजर आ रहे। दो को तो सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने अपने साथ सुप्रीम कोर्ट में भी हाजिर कर दिया।

यह पुरानी कहावत है कि जब जहाज डूबने लगता है तो सबसे पहले चूहे उसमें से छलांग मारने लगते हैं। अब छलांग मारने का सिलसिला चालू हो तो पता चले कि किसकी जहाज धीरे धीरे डूब रही है।

इससे पहले ही उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर जोड़ तोड़ का गणित चर्चा में है जबकि संख्या बल के हिसाब से एनडीए का कुनबा भारी है। चूंकि गुप्त मतदान होगा इसलिए मोटा भाई को टेंशन होना स्वाभाविक है क्योंकि उन्होंने विरोधियों के साथ साथ अपने लोगों में भी कई को काफी नाराज कर रखा है।

फिल्म आशिकी 2 के लिएइस गीत के गीतकार और संगीतकार दोनों मिथुन हैं जबकि इसे स्वर दिया है आज के दौर के प्रसिद्ध गायक अरिजीत सिंह ने। इस गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते
तेरे बिना क्या वजूद मेरा
तुझसे जुदा गर हो जाएँगे
तो खुद से ही हो जाएंगे जुदा
क्योंकि तुम ही हो
अब तुम ही हो
ज़िन्दगी अब तुम ही हो
चैन भी, मेरा दर्द भी
मेरी आशिकी अब तुम ही हो

तेरा मेरा रिश्ता है कैसा
इक पल दूर गंवारा नहीं
तेरे लिए हर रोज़ हैं जीते
तुझको दिया मेरा वक़्त सभी
कोई लम्हा मेरा न हो तेरे बिना
हर सांस पे नाम तेरा
क्योंकि तुम ही हो…

तेरे लिए ही जिया मैं
खुद को जो यूँ दे दिया है
तेरी वफ़ा ने मुझको संभाला
सारे ग़मों को दिल से निकाला
तेरे साथ मेरा है नसीब जुड़ा
तुझे पा के अधूरा ना रहा
क्योंकि तुम ही हो…

सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष दोनों के लिए अभी चुनाव आयोग इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चुनावी माहौल बना रहे। सत्ता पक्ष को ज्ञानेश कुमार जैसा ही चुनाव आयुक्त चाहिए तो इंडिया गठबंधन को भी ऐसा ही निशाना चाहिए जिसे साधा जा सके। बेचारे ज्ञानेश कुमार इन दो पाटों के बीच ऐसा फंस गये हैं कि शायद रिटायर होने के बाद भी परेशानियों से घिरे ही रहेंगे।

अगर सत्ता बदल गयी तो जाहिर है कि राजीव कुमार की भी तलाश होगी। जिन मुद्दों को अभी राजनीतिक सत्ता के गलीचे के नीचे दबाया गया है, वे भी धीरे धीरे ऊपर आने लगेंगे। अगर उपराष्ट्रपति चुनाव में ही कुछ खेला हो गया तो मान लीजिए कि बहुत कुछ रातों रात बदल जाएगा और अफसरों के तेवर भी बदलते नजर आने लगेंगे।

कुछ लोगों को नीतीश कुमार के फिर से पलटू बाबू साबित होने की उम्मीद है लेकिन मेरी समझ में जब तक भागलपुर का सृजन घोटाला खत्म नहीं होता, नीतीश कुमार शायद ऐसी गलती नहीं करेंगे क्योंकि उनके ही करीबी अफसर इसमें फंसे हुए हैं। यह तो सीबीआई की जांच अचानक से बहुत ही धीमी गति से चल रही है तो मामला ठहर सा गया है। वरना अब तक बहुत सारे राज खुल चुके होते।