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हमका अइसा वइसा ना समझो हम बड़े काम की .. .. .. .. ..

इंडिया-पाकिस्तान से लेकर ईरान और इजरायल तक झंझट बंद करा दिया ना। भले अपन लोग स्वीकार ना करें लेकिन सच तो यही है कि युद्धविराम का सबसे पहले एलान अपने ट्रंप भइया ने ही किया था। यह तो हो नहीं सकता कि उन्हें भारत में होने वाली बात चीत सीधे सुनाई पड़ रही हो या फिर उनके पास दैववाणी हो रही हो। जानकारी थी तभी तो कहा कि युद्धविराम करा दिया है।

अपने इंकार के बाद अब तक बारह बार से अधिक बार वह बोल चुके हैं कि टैरिफ का भय दिखाकर युद्ध रूकवा दिया है। दूसरी तरफ वह भी अपने मोदी जी की नकल करने से नहीं चूके। पहले ईरान को चेतावनी दी कि दो सप्ताह में सुधर जाए लेकिन अगले ही रात परमाणु ठिकानों पर हमला कर दिया। ठीक ऐसा ही अपने मोदी जी ने भी किया था। पूरे देश से कहा कि युद्धाभ्यास की तैयारी पूरे देश में होगी। देश इसकी प्रतीक्षा में था तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के खास ठिकानों पर हमला कर दिया।

अब ईजरायल वनाम गाजा और रूस वनाम यूक्रेन बचा है। देखते हैं अपने ट्रंप महाशय क्या कर पाते हैं। पता नहीं उनके  किस दुश्मन ने यह अफवाह फैला दी है कि वह दरअसल नोबल शांति पुरस्कार पाने के लिए सारा कुछ कर रहे हैं। अरे भाई अमेरिका का राष्ट्रपति है, नोबल वालों को इशारा कर देगा तो नोबल कमेटी पुरस्कार लेकर उनके दरवाजे पर आ जाएगी। उन्हें हल्के में कोई नहीं ले सकता, आखिर अंकल सैम तो ठहरे।

इसी बात पर फिल्म अदालत का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था आनंद जी ने और इसे अमिताभ बच्चन और मुकेश कुमार ने गाया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

अरे हमका का समझत, का कहा का समझत हो
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
अरे बाबू बड़े काम की चीज़
कौन बुरा है कौन भला है, अरे कौन बुरा है कौन भला है
हमको है तमीज़
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
ओ बाबू बड़े काम की चीज़

अरे एक दिन हम गए जंगल माँ, अरे एक दिन हम गए जंगल माँ
यहां मिल गए हमका डाकू, ससुरा मिल गए हमका डाकू
किसीके हाथ म बरछा भाला, किसके हाथ माँ चाकू
हा हा किसीके हाथ मे चाकू
हमने पूछा अरे हमने पूछा, कितने हो तुम तब वह बोले दस
हम कहा बस का कहा बस, ऐसा हाथ जमाया दो गज
धरती माँ गए दस दस दस
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
औ बाबू बड़े काम की चीज़

अरे इक दिन अपने गांव माँ, अरे इक दिन अपने गांव माँ
इक मेम शहर से आयी, इक मेम शहर से आयी
देखके अपनी मस्त जवानी, मन माँ वह मुस्काई
अरे मन मा वो मुस्कराइ
बड़े प्यार से, बड़े प्यार से उसने
हमका दिया गुलाबी फूल, हम कहा की का देत हो
हमका फूल का देत हो फूल
हाथ जोड़कर फिर वह बोली हो
गयी हमसे भूल भूल भूल
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
बाबू बड़े काम की चीज़
कौन बुरा है कौन भला है, अरे कौन बुरा है कौन भला है
हमको है तमीज़
हमका ऐसा वैसा ना समझो, हम बड़े काम की चीज़
भैया बड़े काम की चीज़, बबुआ बड़े काम की चीज़
समझ गए ना क्या कहा हाँ

अब इंडिया की बात करें तो महाराष्ट्र की मतदाता सूची चुनाव आयोग के गले की हड्डी बन गया है। कांग्रेस सहित अन्य विरोधी दलों के आरोप पर चुनाव आयोग सफाई तो देता है पर इस वोटर लिस्ट को जारी करने में उसे क्या परेशानी है, यह तो वही जाने। अचानक से इतने वोटरों का बढ़ना और पश्चिम बंगाल में एक वोटर आईडी के कई लोगों का मिलना संदेह को खड़े कर ही देता है।

खैर अब बिहार पर नजर डाल लेते हैं तो त्रिकोण की लड़ाई में किसका वोट कौन ले जाएगा, कहना मुश्किल है। हर चाल पर उल्टी चाल की तैयारी कर भाई लोग बैठे हुए हैं। अलबत्ता टिकट बंटवारे के बाद कितने चेहरे अपना ठिकाना बदल लेंगे, यह कह पाना कठिन है। यह इंडियन पॉलिटिक्स है भाई, यहां दोस्ती और दुश्मनी दोनों एक जैसी है।

अब चलते चलते अपने झारखंड की भी चर्चा कर लें। सत्ता में बैठे कांग्रेसियों को कौन सी खुजली हो रही है, यह पता नहीं चल रहा है। नूरा कुश्ती का दौर जारी है और इससे हेमंत सोरेन जाहिर तौर पर नाराज हो रहे हैं। कहीं गुस्से में पीछा छुड़ाने का फैसला ले लिया तो सारे लोग क्या करेंगे, यह देखने वाली बात होगी।