पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सतर्क है भारतीय सेना
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नियंत्रण रेखा पर छह ड्रोन देखे गये
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तीन सेक्टरों पर इन यंत्रों को देखा गया
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पांच मिनट के अंदर ही वापस भाग गये
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: सोमवार को, भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव उस समय और बढ़ गया जब भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में कई अग्रिम इलाकों में पाकिस्तान से आए कम से कम छह ड्रोनों को देखा। इन ड्रोनों की घुसपैठ के बाद, सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य किसी भी संभावित घुसपैठ या अवैध सामग्री की डिलीवरी को रोकना था।
यह घटना रविवार रात लगभग 9:15 बजे हुई, जब सुरक्षा बलों के जवानों ने मेंढर सेक्टर के बालाकोट, लंगोटे और गुरसाई नाले के ऊपर सीमा पार से ड्रोन की हलचल देखी। अधिकारियों के अनुसार, ये ड्रोन काफी ऊँचाई पर उड़ रहे थे और माना जा रहा है कि इन्हें जासूसी या निगरानी के उद्देश्य से भेजा गया था।
चश्मदीदों के मुताबिक, ये ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र में पाँच मिनट से भी कम समय तक रहे और उसके बाद तुरंत पाकिस्तान की सीमा में लौट गए। इस तरह की संक्षिप्त अवधि की घुसपैठ अक्सर सीमा पार से होने वाली गतिविधियों का एक सामान्य तरीका है, जहाँ दुश्मन यह जाँचने की कोशिश करता है कि भारतीय सुरक्षा बल कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देते हैं।
ड्रोन की गतिविधि की पुष्टि होते ही, पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। सुरक्षा बलों ने तुरंत उन सभी क्षेत्रों की घेराबंदी कर दी जहाँ ड्रोन देखे गए थे। सुबह होते ही, भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से एक गहन तलाशी अभियान शुरू किया।
इस तलाशी अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि इन ड्रोनों द्वारा हवाई मार्ग से कोई हथियार, गोला-बारूद या नशीले पदार्थ न गिराए गए हों। सुरक्षा एजेंसियाँ इस संभावना को लेकर चिंतित हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन इन ड्रोनों का उपयोग भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के लिए सहायता सामग्री पहुँचाने के लिए कर सकते हैं।
हाल के महीनों में, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन की घुसपैठ की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। पिछले कुछ समय से, पाकिस्तान सीमा पार से हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहा है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह पाकिस्तान की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य बिना सीधे टकराव के भारत में अस्थिरता फैलाना है। इन गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए, भारतीय सुरक्षा बल न केवल अपनी निगरानी बढ़ा रहे हैं, बल्कि ड्रोन-रोधी प्रणालियों (anti-drone systems) को भी तैनात कर रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में राजौरी और पुंछ जिलों में कई मुठभेड़ें हुई हैं, जिनमें भारतीय सेना के जवान शहीद हुए हैं। सुरक्षा बलों का मानना है कि इन घटनाओं का संबंध सीमा पार से होने वाली गतिविधियों से है। फिलहाल, तलाशी अभियान जारी है और सुरक्षा एजेंसियाँ ड्रोन की आवाजाही के पीछे के उद्देश्य का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। सुरक्षा बलों ने स्थानीय निवासियों से भी अपील की है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध वस्तु मिलती है, तो वे तुरंत इसकी सूचना दें। यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि भारत को सीमा पार से होने वाले इस नए खतरे से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।