Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Giridih News: सड़क हादसे में नवविवाहिता का उजड़ा सुहाग, पति की दर्दनाक मौत से मातम में बदली खुशियां JMM News: झामुमो की नीतीश-नायडू से अपील- 'मोदी सरकार से लें समर्थन वापस', नारी शक्ति वंदन एक्ट को बत... Palamu Crime News: चैनपुर में आपसी विवाद में फायरिंग, ट्यूशन से लौट रहे नाबालिग छात्र को लगी गोली Bokaro News: बोकारो में श्रद्धा और उल्लास से मन रहा 'भगता पर्व', जानें इस खास त्योहार की पूजा विधि औ... Jharkhand News: ग्रामीण विकास विभाग के कर्मी होंगे हाईटेक, AI तकनीक से लैस करेगी सरकार- मंत्री दीपिक... Jharkhand Cabinet Decisions: हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण होंगे वैध; D... CBSE 10th Result Jharkhand Topper: डीपीएस रांची की प्रण्या प्रिया बनीं स्टेट टॉपर, हासिल किए 99.6% अ... CG Cabinet Decisions: छत्तीसगढ़ में जमीन रजिस्ट्री पर बड़ी राहत, 50% स्टाम्प शुल्क छूट समेत साय कैबि... Khairagarh News: उदयपुर में ATM उखाड़ने की कोशिश नाकाम, पुलिस ने 24 घंटे में शातिर चोर को किया गिरफ्... Jashpur Crime News: महिला अपराध और नशा तस्करों पर जशपुर पुलिस का 'डबल एक्शन', कई आरोपी दबोचे गए

चोर निकलता है काली सी सड़क पे.. .. .. ..

यह तो पुरानी बात हो गयी अब तो दिनदहाड़े चोरी हो रही है और चोरी में मदद करने वाले भी बड़ी शान से सीनाजोरी भी कर रहे हैं। बिना किसी लाग लपेट के कहें तो यह महादेवपुरा के बारे में राहुल गांधी के खुलासे के बाद चुनाव आयोग की चर्चा है। कमाल की बेशर्मी है कि अब भी कह रहे हैं कि शपथपत्र दाखिल करे।

सामने वाले नेता प्रतिपक्ष है और सबके सामने दावा कर रहा है कि यह सारे आंकड़े चुनाव आयोग के हैं तो चुनाव आयोग को कहना चाहिए कि सारे आंकड़े झूठे हैं। दूसरी तरफ भाजपा के साइबर सेल वाले भी सक्रिय हो गये हैं। पता नहीं क्यों, इनलोगों को यह भ्रम हो गया है कि इंडियन मैंगो मैन एकदम बुद्धू है। अरे यार जब गाड़ी फंसेगा तो पता चलेगा कि पब्लिक ने चुपके से तुम्हारी लंगोटी भी खींच ली है। उस वक्त लज्जा निवारण करते रहना।

कई बार तो लगता है कि मोदी जी का भी समय खराब चल रहा है। जिसके चलते अमेरिका जाकर इतना कांड किये, वहीं बार बार बेइज्जत कर रहा है और टैरिफ का बोझ भी बढ़ा रहा है। पता नहीं अंदरखाने में कौन सा राज छिपा है कि लगातार सदन के अंदर चुनौती दिये जाने के बाद भी बेचारे कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। एक लाइन तो कहना था कि डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहे हैं पर उसमें भी परहेज है। इससे भी शक और पुख्ता होता जा रहा है।

कमाल तो अपने मीडिया वाले दोस्त यार भी कर रहे हैं। जिनलोगों से सवाल पूछा जाना चाहिए उन्हें क्लीन चिट दे रहे हैं और जिनसे सवालों के साथ खड़ा होना चाहिए, उनके सवालों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। राहुल गांधी ने ठीक ही कहा है कि जिस किसी दिन सरकार बदली तो बहुत लोगों को इसका खामियजा भुगतना पड़ेगा।

कुछ लोगों ने तो शायद मन ही मन इसकी तैयारी भी कर रखी होगी क्योंकि उन्हें भी पता है कि सरकार बदली तो उनके मालिकों के तेवर भी बदल जाएंगे और साथ में ऐसे लोगों की नौकरी भी चली जाएगी। इसलिए माल इकट्ठा कर रहे हैं ताकि भविष्य के संकट में काम आता रहे।

इसी बात पर फिल्म राजा रानी का एक चर्चित गीत याद आने लगा है। इश गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने औऱ संगीत में ढाला था राहुल देव वर्मन ने। इसे आशा भोंसले, भूपेंद्र और अन्य ने गाया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

जब अंधेरा होता है, आधी रात के बाद

एक चोर…, पा पर पा…

निकलता है, काली सी सड़क पे

ये आवाज़, आती है

चोर-चोर, चोर-चोर, चोर-चोर, चोर-चोर

शहरों की गलियों में जब अंधेरा होता है

आधी रात के बाद

एक चोर निकलता है, काली सी सड़क पे

ये आवाज़ आती है

चोर-चोर, चोर-चोर, चोर-चोर, चोर-चोर

शहरों की गलियों में जब…

अंधेरा होता है, आधी रात के बाद…

लोग बन्द कमरों में, चैन से जब सोते हैं

लोग बन्द कमरों में, चैन से जब सोते हैं

ये जागता है सारी रात भागता है

ताले टूटे, होते हैं, जब सवेरा होता है, या

पप परा… , जब अंधेरा…

सुन लो पहरेदारों, होश में रहना यारों

सुन लो पहरेदारों, होश में रहना यारों

साथ घूमती है, नागन रात झूमती है

अल्बेला, मस्ताना, वो सवेरा होता है, या

पप पर… , जब अंधेरा…

वइसे सोशल मीडिया पर यह देखकर अच्छा लग रहा है कि आम लोग, जो कुप्रचार को पढ़कर आगे निकल जाया करते थे, अब सोशल मीडिया में इस किस्म का भ्रामक प्रचार अभियान चलाने वालों से भी सवाल पूछने लगे हैं। पिछले चौबीस घंटों का यह असर है कि लगातार राहुल को कटघऱे में खड़ा करने की मुहिम अचानक से धीमी पड़ने लगी है और मोदी के समर्थन में झंडा उठाने वालों की तादाद तेजी से कम हो रही है।

शायद कुछ लोगों ने अपने स्वयं के दिमाग का उपयोग करना प्रारंभ कर दिया है। डर इस बात का बना रहता है कि सरकार किसी की भी रहे, असली हुक्म तो ब्यूरोक्रेसी का चलता है। सरकार के हाकिम बदले तो यह सारे नौकरशाही भी रातों रात बदल जाएंगे और तब पता नहीं आज जिनलोगों से जनता पीछा छुड़ाना चाहती है, वे फिर से उसी ताकत के साथ सत्ता के गलियारे में नजर आने लगे।

झारखंड में इसका अच्छा अनुभव रहा है। मुख्यमंत्री कोई भी रहे लेकिन दलालों का गिरोह एक ही रहता है। ट्रांसफर, पोस्टिंग से लेकर ठेका पट्टा तक सिर्फ मुख्यमंत्री आवास के चेहरे बदल जाते हैं, गिरोह के लोग वैसे ही बने रहते हैं और उनकी दुकानदारी भी ठीक पहले जैसी चलती रहती है। लेकिन उनका क्या होगा, जो स्वामीभक्ति में पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। अब तो यही देखने वाली बात होगी।