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जेडीयू सांसद और विधायक ने उठाए गंभीर सवाल

बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सत्तारूढ़ गठबंधन में मतभेद

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी जेडीयू के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव और पार्टी विधायक डॉ संजीव ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन में मतभेद सामने आ गए हैं।

सांसद गिरिधारी यादव ने बुधवार को एसआईआर का विरोध करते हुए कहा कि यह अभियान पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों पर सवाल खड़ा करेगा। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर अभियान ने लोगों, खासकर गरीबों को अनावश्यक रूप से परेशान किया है।

यादव ने कहा कि लोग इस समय धान की खेती में व्यस्त हैं और उन्हें अपने दस्तावेज ढूंढने और अधिकारियों के पास जमा करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को एसआईआर के लिए कम से कम छह महीने का समय देना चाहिए ताकि पात्र मतदाताओं को आवश्यक प्रमाण जमा करने और अपात्र लोगों के नाम हटाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

यादव ने यह भी सवाल उठाया कि अगर लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची सही थी, तो कुछ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वह गलत कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा, क्या मुझे गलत मतदाता सूची के आधार पर चुना गया था? इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस जल्दबाजी वाली प्रक्रिया के कारण बिहार से बाहर रहने वाले लाखों प्रवासी अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

अपनी पार्टी के एसआईआर को समर्थन के सवाल पर गिरिधारी यादव ने स्पष्ट किया कि वह एक लोकसभा सदस्य के रूप में अपनी स्वतंत्र राय व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि उन्हें खुद अपने दस्तावेज इकट्ठा करने में 10-11 दिन लग गए। उन्होंने यह भी कहा, मेरा बेटा अमेरिका में रहता है। मुझे नहीं पता कि मेरा बेटा अब बिहार में मतदाता होगा या नहीं।

जेडीयू विधायक डॉ संजीव ने भी गिरिधारी यादव का समर्थन करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में कई ऐसे मतदाता हैं जो बाहर रहकर मजदूरी करते हैं और उन्हें अपना फॉर्म भरने में समस्या आ रही है। डॉ. संजीव ने कहा कि यह समस्या स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इस विरोध से बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान की निष्पक्षता और व्यावहारिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।