Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जर्मनी से एक दर्जन पनडुब्बियां खरीदेगा कनाडा अमेरिकी सेना की पोलैंड में तैनाती कायम रहेगीः रक्षा प्रमुख आईएसआईएल से जुड़े आतंकी मॉड्यूल को धर दबोचा Deep Narayan Singh Yadav: सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव की बढ़ी मुश्किलें, लखनऊ-झांसी में... Narmada Award Dispute: 4 राज्यों के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता, अमित शाह की मौजूदगी में सुलझा सालों पुर... Alliance Reality Show: कुशाल टंडन से भिड़ीं उर्फी की बहन डॉली जावेद, शो में मचा बवाल पैसे और धमकियों से प्रवासियों को खपा रहा अमेरिका Monsoon Car Care Tips: बारिश में अपनी कार को जंग और हादसों से कैसे बचाएं? अपनाएं ये आसान टिप्स Ram Mandir Trust: SBI खातों के संचालन के लिए 3 सदस्यीय समिति गठित, बिना हस्ताक्षर नहीं निकलेगा पैसा होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकर पर मिसाइल हमला

पुतिन की भारत यात्रा से पहले पेशकश

भारत को दुनिया के अन्यतम श्रेष्ठ टैंक देने का प्रस्ताव

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले, जो यूक्रेन युद्ध के बाद उनकी पहली यात्रा होगी, रूस ने भारत को कई महत्वपूर्ण सैन्य सौदे प्रस्तावित किए हैं। इनमें सुखोई-57 स्टील्थ लड़ाकू विमान का भारत में सह-उत्पादन और अब, दुनिया के सबसे शक्तिशाली टैंकों में से एक, टी-14 आर्मटा का संयुक्त निर्माण शामिल है।

रूस विशेष रूप से भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार टी-14 टैंक का एक विशिष्ट संस्करण विकसित करने को तैयार है, और इसे बनाने वाली रूसी कंपनी एक भारतीय कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम (Join Venture) स्थापित करना चाहती है। भारतीय सेना को नई पीढ़ी के टैंकों की तत्काल आवश्यकता है, खासकर जब से भारत दशकों से रूस से टैंक खरीदता रहा है, जैसे कि टी-72 और उन्नत टी-90 टैंक।

रूस भारत के साथ आर्मटा टैंक की तकनीक साझा करके संयुक्त उत्पादन करना चाहता है। भारत में पहले से ही टी-90 टैंकों का निर्माण होता है, जो वर्तमान में भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंक हैं। टी-14 टैंक पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली से लैस है और इसके बुर्ज में किसी भी सैनिक को बैठने की आवश्यकता नहीं होती है।

यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से भी सुसज्जित है। इसे चलाने वाले सैनिक चारों ओर से एक बख्तरबंद कैप्सूल के अंदर सुरक्षित रहते हैं। रूसी सेना के तकनीकी अधिकारी व्लादिमीर द्रोझझोव ने 2023 में ही कहा था कि रूस यह तकनीक भारत को साझा करने के लिए तैयार है। अब पुतिन की यात्रा से पहले इस टैंक को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो गई है।

भारत और रूस के बीच पिछले कई वर्षों से इस संबंध में बातचीत चल रही है। भारत के वर्तमान टैंक, टी-72 और टी-90, अब काफी पुराने होते जा रहे हैं, और एक आधुनिक पीढ़ी के टैंक की सख्त आवश्यकता है, विशेष रूप से तब जब चीन और पाकिस्तान भी लगातार अपनी टैंक शक्ति बढ़ा रहे हैं। माना जा रहा है कि भारत जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय निविदा जारी कर सकता है।

हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि भारत पुतिन के इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं। इसका एक बड़ा कारण पश्चिमी देशों द्वारा रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध हैं। वहीं, पश्चिमी देश भारत और रूस की दोस्ती को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तो रूसी तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ 125 प्रतिशत शुल्क लगाने की चेतावनी भी दी थी।

रूस चाहता है कि भारत अपने फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल परियोजना के लिए टी-14 को मंजूरी दे। भारत का टी-72 टैंक 40 साल से भी अधिक पुराना है। भारत ने अपना स्वदेशी अर्जुन टैंक बनाया है, लेकिन उसे बहुत कम संख्या में शामिल किया जा रहा है। भारत चाहता है कि आत्मघाती ड्रोन और हमलावर ड्रोन के बढ़ते खतरे के बीच एफआरसीवी को अधिक सुरक्षा उपायों से लैस किया जाए। इसमें निगरानी और जासूसी की क्षमता भी शामिल है। भारत को फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी और इटली भी अपने टैंक बेचना चाहते हैं।