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अजीत अंजुम के वीडियो ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की पोल खोल दी

बीएलओ खुद भर रहे हैं फॉर्म, मृतकों के भी नाम

राष्ट्रीय खबर

पटनाः बिहार में विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जिससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रमुख पत्रकार अजीत अंजुम और कई अन्य वीडियो पत्रकारों ने इन कथित धांधलियों को उजागर किया है। उल्लेखनीय है कि विपक्षी दल राजद और कांग्रेस पहले से ही इस प्रक्रिया को वोट चोरी की साजिश बताते आ रहे थे, और अब उनके आरोप सही साबित होते दिख रहे हैं।

अजीत अंजुम के एक हालिया वीडियो में पटना के एक ब्लॉक कार्यालय में एसआईआर फॉर्म्स में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के पुख्ता सबूत दिखाए गए हैं। वीडियो में कई मतदाताओं ने यह साफ तौर पर कहा है कि उनकी सहमति या हस्ताक्षर के बिना ही उनके नाम से फॉर्म जमा कर दिए गए हैं। दस से अधिक मतदाताओं ने अंजुम को बताया कि, उन्हें किसी बूथ लेवल ऑफिसर से कभी कोई जानकारी नहीं मिली। उन्हें कोई फॉर्म दिया ही नहीं गया। उन्होंने किसी भी फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बावजूद, उनके नाम और फर्जी हस्ताक्षरों के साथ एसआईआर फॉर्म जमा कर दिए गए।

अजीत अंजुम ने बेगूसराय के एक प्रखंड में भी इसी तरह की अनियमितताओं का जिक्र किया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है। अंजुम ने इसे सच्चाई को दबाने की कोशिश बताया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने भी इस धांधली की गंभीरता को उजागर करने वाले कुछ अन्य मामलों का हवाला दिया है। उन्होंने जमुई में एक जेली विक्रेता के पास हजारों की संख्या में फॉर्म मिलने और पटना के गांधी मैदान के पास एक फ्लाईओवर पर फेंके गए फॉर्म्स के वीडियो का जिक्र किया, जो इस फर्जीवाड़े की व्यापकता को दर्शाता है।

इस विवाद में एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक फौजी अधिकारी को खुद अपनी आंखों से धांधली देखने को मिली। यह अधिकारी एसआईआर का फॉर्म भरने के लिए जोधपुर से छुट्टी लेकर जहानाबाद आए थे। उन्होंने बताया कि बीएलओ ने उनके घर पर फॉर्म छोड़ दिए थे। फौजी अधिकारी ने अपने, अपनी पत्नी और मां के फॉर्म भरकर संबंधित दस्तावेजों के साथ बीएलओ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन तीन दिनों तक बीएलओ उनसे नहीं मिले।

चौथे दिन, 18 जुलाई को, फौजी अधिकारी खुद बीएलओ के घर पहुंच गए। बीएलओ ने उन्हें बताया कि उन्होंने उनके सभी फॉर्म पहले ही अपलोड कर दिए हैं। इस पर फौजी अधिकारी ने नाराजगी जताई और पूछा, मेरा फॉर्म मेरे पास है तो आपने इसे कैसे जमा कर दिया बीएलओ ने जवाब में कहा कि उन्होंने एक्नॉलेजमेंट वाला फॉर्म डाउनलोड करके उसे भरकर जमा कर दिया

खुद को फंसते देख, बीएलओ ने एक माफीनामा लिखकर दिया। अजीत अंजुम के इस खुलासे को कई घंटे बीत चुके हैं, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस धांधली पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। न तो कोई जवाब दिया गया है, न खंडन किया गया है और न ही कोई स्पष्टीकरण जारी किया गया है। एक अन्य चौंकाने वाला मामला यह भी सामने आया है कि जिस व्यक्ति की मां का निधन छह साल पहले और पिता का निधन सात महीने पहले हो गया था, उनके मृत माता-पिता का फॉर्म भी ऑनलाइन अपलोड कर दिया गया है।