Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण के मुद्दे पर NDA का बड़ा ऐलान, विपक्ष के खिलाफ कल देशभर में होग... Sabarimala Case: आस्था या संविधान? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच के सामने तीखी बहस, 'अंतरात्मा की... Rahul Gandhi Case: दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी की बढ़ेंगी मुश्किलें, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने द... Singrauli Bank Robbery: सिंगरौली में यूनियन बैंक से 20 लाख की डकैती, 15 मिनट में कैश और गोल्ड लेकर फ... Delhi Weather Update: दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश से बदला मौसम, IMD ने अगले 24 घंटों के लिए जारी किया... Jhansi Viral Video: झांसी के ATM में घुस गया घोड़ा! गेट बंद होने पर मचाया जमकर बवाल; वीडियो हुआ वायर... Amit Shah in Lok Sabha: 'कांग्रेस ही OBC की सबसे बड़ी विरोधी', महिला आरक्षण पर अमित शाह ने विपक्ष को... Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, विपक्ष ने कहा- 'बीजेपी... Haryana Revenue: अब राजस्व संबंधी शिकायतों का 48 घंटे में होगा समाधान, हरियाणा सरकार ने शुरू की नई स... Gurugram News: अवैध पेड़ कटाई पर NGT का बड़ा एक्शन, हरियाणा सरकार को 4 हफ्ते का अल्टीमेटम; रिपोर्ट न...

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम मामले से उठे सवाल

बिहार में विधानसभा चुनाव से परले पत्रकारिता पर बढ़ते दबाव की चिंता

  • एक निष्पक्ष पत्रकार के तौर पर पहचान है

  • बीएलओ ने दायर किया है यह मुकदमा

  • सुशासन बाबू के राज में भी यही हाल

दीपक नौरंगी

भागलपुरः बिहार में वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ बेगूसराय के बलिया थाना क्षेत्र में दर्ज की गई प्राथमिकी ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर बढ़ते दबाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और इसे पत्रकारों को डराने-धमकाने तथा उनकी आवाज दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

अजीत अंजुम पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर भाग संख्या 16, साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मो. अंसारुल हक ने दर्ज करवाई है। बीएलओ ने आरोप लगाया है कि 12 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे अजीत अंजुम, उनके सहयोगी और कैमरामैन बिना अनुमति बलिया प्रखंड सभागार में घुस आए और उनसे सवाल-जवाब करने लगे।

बीएलओ के अनुसार, अंजुम ने उनसे बूथ पर मतदाताओं की संख्या, फार्म वितरण और वापसी, मुस्लिम मतदाताओं की संख्या, और दस्तावेजों के जमा होने के बारे में पूछा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंजुम बार-बार इस बात पर जोर दे रहे थे कि मुस्लिम मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है, जिसे बीएलओ ने गलत बताया। बीएलओ ने दावा किया कि अजीत अंजुम और उनकी टीम करीब एक घंटे तक वहां मौजूद रही, जिससे सरकारी कामकाज में बाधा हुई। हालांकि, अंजुम के समर्थकों का कहना है कि वे 40 मिनट के भीतर ही अपनी खबर बनाकर लौट गए थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन में भी पत्रकारों पर बेवजह दबाव डालने, डराने-धमकाने, और यहां तक कि झूठे मुकदमों में फंसाने की कोशिशें आम होती जा रही हैं। अतीत में भी बिहार में पत्रकारों की हत्याएं हुई हैं और उन पर बेवजह मामले दर्ज किए गए हैं। अजीत अंजुम जैसे बेदाग छवि वाले पत्रकार, जिनकी पूरे देश में एक अलग पहचान है और जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी बेहतर मानी जाती है, पर इस तरह का आरोप लगना निश्चित रूप से चिंताजनक है।

सत्ता में बैठे लोग और उनके इशारों पर काम करने वाला प्रशासन, पत्रकारों की आवाज दबाने के लिए संगठित साजिशें रच रहे हैं। जब कोई पत्रकार भ्रष्टाचार, कुप्रशासन या जनहित से जुड़े सवाल उठाता है, तो उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बदले में उत्पीड़न और कानूनी जाल का सामना करना पड़ता है। उनके खिलाफ झूठे केस बनाए जाते हैं ताकि वे चुप हो जाएं या रास्ता बदल लें। यह स्थिति न केवल पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को भी कमजोर कर रही है।