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विवाद बढ़ा तो चुनाव आयोग की तरफ से सफाई दी गयी

करीब पांच करोड़ वोटरों को सबूत नहीं देना है

  • आज जारी की गयी प्रेस विज्ञप्ति
  • बच्चों को गार्जियन का दस्तावेज नहीं देना
  • मतदाता सूची ऑनलाइन भी उपलब्ध होंगे

नईदिल्लीः चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाया है और उसमें शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को समीक्षा के दौरान अपनी पहचान के सबूत के तौर पर कोई दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

चुनाव आयोग ने सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची उसकी वेबसाइट पर अपलोड की गयी है जिसमें 4.96 करोड़ मतदाताओं के विवरण शामिल हैं। आयोग ने कहा कि इस सूची के मतदाताओं को समीक्षा के दौरान कोई दस्तावेज नहीं देना होगा तथा इनके बच्चों को अपने माता-पिता से संबंधित कोई दस्तावेज जमा कराने की भी जरूरत नहीं है।

आयोग ने वहां इस वर्ष होने जा रहे राज्य विधान सभा चुनावों से पहले बूथ  स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर भेज कर सूचियों की विशेष गहन समीक्षा  कराने का अभियान शुरू किया है। आयोग ने गत सप्ताह मंगलवार  24 जून के आयोग के निर्देशों के पैरा 5 में उल्लेख किया गया था कि सीईओ/डीईओ/ईआरओ 01.01.2003 की अर्हता तिथि वाली मतदाता सूची को सभी बीएलओ को हार्ड कॉपी में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराएंगे,

साथ ही अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध कराएंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति इसे डाउनलोड कर सके और अपना गणना फॉर्म जमा करते समय दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में उपयोग कर सके। आयोग का कहना है, वर्ष 2003 की मतदाता सूची सामने होने से विशेष गहन पुनरीक्षण में काफी सुविधा होगी क्योंकि अब कुल मतदाताओं में से लगभग 60 प्रतिशत को कोई दस्तावेज जमा नहीं करना होगा। उन्हें केवल नामावली में वर्ष 2003 की मतदाता सूची से अपने विवरण को सत्यापित करना होगा और भरा हुआ गणना फॉर्म जमा करना होगा। मतदाता और बीएलओ दोनों ही इन विवरणों तक आसानी से पहुँच सकेंगे।

आयोग के निर्देशों के अनुसार,कोई भी व्यक्ति जिसका नाम वर्ष 2003 की बिहार मतदाता सूची में नहीं है, वह अभी भी अपने माता या पिता के लिए कोई अन्य दस्तावेज प्रदान करने के बजाय  वर्ष 2003 की मतदाता सूची के संबंधित हिस्से (अंश) का उपयोग कर सकता है। ऐसे मामलों में, उसके माता या पिता के लिए किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी।

ऐसे मामलों में केवल 2003 ईआर का प्रासंगिक हिस्सा/विवरण ही पर्याप्त होगा। आयोग ने कहा है कि ऐसे मतदाताओं को भरे हुए गणना फॉर्म के साथ केवल अपने लिए दस्तावेज जमा करने होंगे। आयोग ने  संविधान के अनुच्छेद 326 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा है कि केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के भारतीय नागरिक और उस निर्वाचन क्षेत्र के सामान्य निवासी ही मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के पात्र हैं।