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छूटे हुए वोटरों को जोड़ने का विशेष अभियान चलेगा

चौतरफा आरोपों से घिर जाने के बाद अब बचाव की तैयारी

अपने ही फैसले से फिर यू टर्न

देश भर में आलोचना हो रही है

ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर पर सवाल

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश भर में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर उठ रहे सवालों के बीच एक अहम कदम उठाया है। आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, जहाँ यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, मतदाता सूचियों से बाहर रह गए या छूट गए मतदाताओं को फिर से जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का सख्त निर्देश दिया है। यह निर्देश 29 सितंबर को लिखित रूप में जारी किया गया और हाल ही में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी दोहराया गया।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आयोग को 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मसौदा सूचियों से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के कारण कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के भीतर ही इस पूरी प्रक्रिया और निर्णयों पर 10 महीनों में 14 बार अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। इन आपत्तियों में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे।

29 सितंबर को जारी पत्र के अनुसार, जिन राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और ईआरओ मिलकर छूटे हुए, युवा और पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिकों के नामांकन के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। इस अभियान के तहत उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-6 से जुलाई में जोड़े गए उस विवादास्पद सवाल को हटा दिया गया है, जिसमें आवेदकों से यह पूछा जाता था कि क्या वे या उनके माता-पिता एसआईआर सूची में शामिल हैं।

इसके अलावा, महाराष्ट्र, जहां एसआईआर की प्रक्रिया अभी जारी है, के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी मतदाता का नाम जल्दबाजी में नहीं काटा जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पात्र मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने का पूरा अवसर मिले, उनकी सुनवाई हो और किसी भी वैध मतदाता के मताधिकार में कोई बाधा न आए। आयोग के इस निर्देश से देश भर में छूटे हुए मतदाताओं को राहत मिलने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होने की उम्मीद है।