Breaking News in Hindi

भारत की कार्य संस्कृति जन-हितैषी हैः मोदी

यूपीएससी के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का प्रमुख संबोधन

ऐसी संस्थानों की जरूरत देश को है

परीक्षा समय पर ही आयोजित हों

नागरिकों की सेवा ही सर्वोपरि है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश रिफॉर्म एक्सप्रेस पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थानों को भी देश की आवश्यकता के अनुरूप सुधार करने चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी परीक्षा को मात्र एक कार्यक्रम नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि यह देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है, इसलिए परीक्षा प्रणाली को समय-बद्धता के सिद्धांत का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की 100 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान पीढ़ियां, सरकारें, तकनीक और पाठ्यक्रम बदले हैं, लेकिन इस संस्था के प्रति लोगों का विश्वास आज भी उतना ही अटूट है। उन्होंने ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाने की आवश्यकता पर बल दिया जो केवल पद के प्रति नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रति समर्पित हों। उन्होंने कहा कि आज का 21वीं सदी का भारत एक नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है जिसका मूल मंत्र जन-हितैषी, सक्रिय और सुशासन है। सरकार का मुख्य मंत्र नागरिक देवो भव: है और नागरिकों की सेवा सर्वोपरि है।

समारोह में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में यूपीएससी ने कई मील के पत्थर हासिल किए हैं और नियुक्तियों में पारदर्शिता बढ़ने से जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है। यूपीएससी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा कि आयोग ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि उम्मीदवारों का चयन केवल उनकी योग्यता के आधार पर हो और वर्तमान में सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने वालों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक सिक्का, एक डाक टिकट और एक पुस्तक का विमोचन भी किया।