अमेरिका में जैविक पदार्थों की कथित तस्करी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें 8 जून को एक चीनी छात्र को मिशिगन विश्वविद्यालय में छह महीने की अवधि में चार पैकेज भेजने के लिए गिरफ्तार किया गया। इनमें राउंडवॉर्म की खेती के लिए जैविक पदार्थ थे। उससे कुछ दिन पहले ही, दो अन्य चीनी नागरिकों पर मिशिगन विश्वविद्यालय की उसी प्रयोगशाला में फ़सल को नुकसान पहुँचाने वाले कवक, फ्यूजेरियम ग्रैमिनेरम की तस्करी करने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया था।
राउंडवॉर्म एक जैविक हथियार नहीं है, लेकिन पिछली घटना में तस्करी किए गए कवक का उपयोग फसलों को नुकसान पहुँचाने के लिए किया जा सकता है, जो कृषि जैव आतंकवाद होगा। जैविक हथियार मनुष्यों, जानवरों या फसलों को नुकसान पहुँचाने के लिए बैक्टीरिया, वायरस, जीवाणु विषाक्त पदार्थों और अन्य जैविक पदार्थों का उपयोग हैं। जब राष्ट्र राज्यों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है, तो इसे जैव युद्ध कहा जाता है, और जब गैर-राज्य अभिनेताओं (जैसे आतंकवादी समूह) द्वारा इसका उपयोग किया जाता है, तो इसे जैव आतंकवाद कहा जाता है।
तीन साल पहले, रीडली, कैलिफ़ोर्निया में एक अवैध प्रयोगशाला की गलती से पहचान की गई थी, जिसमें आनुवंशिक रूप से इंजीनियर चूहे और कई तरह के वायरस थे। यह प्रयोगशाला एक चीनी बायोटेक कंपनी के स्वामित्व में थी, जो कथित तौर पर कोविड रैपिड एंटीजन टेस्ट बना रही थी। जैव हथियारों को गरीब आदमी का परमाणु हथियार कहा जाता है क्योंकि वे परमाणु हथियारों की तुलना में कहीं अधिक सुलभ हैं।
दरअसल पूरी दुनिया में कोरोना महामारी के बाद से यह सवाल यथावत कायम है कि यह वायरस आखिर फैला कैसे। इसकी जांच के निष्कर्ष आम आदमी के पल्ले नहीं पड़े। अब नए वायरस बनाने और मौजूदा वायरस की जेनेटिक इंजीनियरिंग करके उन्हें अधिक घातक बनाने की तकनीक जैविक जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए हमारी प्रणालियों की तुलना में बहुत तेज़ गति से आगे बढ़ी है।
वर्तमान में अधिकांश देशों में विश्वविद्यालयों के भीतर जासूसी का पता लगाने के लिए पर्याप्त जागरूकता या प्रक्रियाएँ नहीं हैं। न ही हमारे पास प्रयोगशाला से किसी संदिग्ध दुष्ट वैज्ञानिक को तत्काल हटाने के लिए पर्याप्त कानून हैं।
इसी बात पर अपने जमाने की प्रसिद्ध फिल्म दुश्मन का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने और संगीत में ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। इसे किशोर कुमार ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल इस तरह हैं।
मैंने देखा तूने देखा, मैंने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा, सब ने देखा
मैंने देखा तूने देखा,
इसने देखा उसने देखा, सब ने देखा
क्या देखा क्या
देखा इक दुश्मन, जो दोस्तों से प्यारा
है इक दुश्मन, जो दोस्तों से प्यारा है
मैंने देखा तूने देखा, मैंने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा, सब ने देखा
क्या देखा क्या
देखा एक गाँव, जो शहरों से भी
न्यारा है एक गाँव
जो शहरों से, भी न्यारा है
दुश्मन दुश्मन, जो दोस्तों से प्यारा है
आज सज़ा देंगे तुझको हम, तेरी सब भूलों की
आज सज़ा देंगे तुझको हम, तेरी सब भूलों की
तेरे गले में हम डालेंगे, ये माला फूलों की
इस गाँव की रीत यही है, जीवन संगीत यही है
आज के दिन का गीत यही है, यही है
मैंने देखा तूने देखा, मैंने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा, सब ने देखा
क्या देखा क्या
देखा इक चाँद, जो सबकी आँख का
तारा है इक चाँद, जो सबकी आँख का तारा है
दुश्मन दुश्मन, जो दोस्तों से प्यारा है
ज़ंजीरों से भी पक्के हैं, प्रेम के कच्चे धागे
ज़ंजीरों से भी पक्के हैं, प्रेम के कच्चे धागे
इन कच्चे धागों को, तोड़के क़ैदी कैसी भागे
आया लेके हरियाली तू, इन बागों का माली तू
इन खेतों का हाली तू हाली तू
मैंने देखा तूने देखा, मैंने देखा तूने देखा
इसने देखा उसने देखा, सबने देखा
क्या देखा क्या देखा
इक क़ैदी जो पहरेदार, हमारा है
इक क़ैदी जो पहरेदार हमारा है।
दुश्मन दुश्मन, जो दोस्तों से प्यार है
सब ने माफ़ किया मुझको पर
मैं हूँ जिसका दोषी
सब ने माफ़ किया मुझको पर
मैं हूँ जिसका दोषी
कब टूटेगी उसके घायल, होंठों की खामोशी
वो भी माफ़ करे तो जानूं
मन को साफ़ करे तो जानूं
इंसाफ करे तो, जानूँ तो जानूं
मेरा नहीं तेरा नहीं, मेरा नहीं तेरा नहीं
इसका नहीं उसका नहीं, किसी का नहीं
ये दोष तक़दीर, का सारा है
ये दोष तक़दीर, का सारा है।
इसलिए हर आने वाला विदेशी अपना दोस्त है, यह सोच भी अब जैविक हथियार के दौर में अस्वीकार्य है। पूंजीनिवेश के चक्कर में भारत ऐसा अंधा हो रहा है कि उसे हर ऐसा निवेश देश की तरक्की दिखता है। अरे भाई कोई भी पैसा लगाता है, सिर्फ पैसा कमाने के लिए वह कोई लंगर खोलने नहीं आ रहा है, इस बात को समझना होगा।