Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
सीमा पर चंद दिनों की शांति फिर से भंग हो गयी बेलारूसी राष्ट्रपति लुकाशेंको उत्तर कोरिया पहुंचे भारत के सबक सीखने का समय है यह भगवंत मान सरकार की अगुवाई में ‘ए.आई. क्रांति’ किसानों की आय बढ़ाकर पंजाब के भविष्य को सुरक्षित करेगी 'रॉयल एनफील्ड' छोड़ 'रॉयल सवारी' पर निकला बैंककर्मी! पेट्रोल नहीं मिला तो घोड़े पर बैठकर ऑफिस पहुंचा... रूह कंपा देने वाला हादसा! आंध्र प्रदेश में बस और ट्रक की जोरदार टक्कर, आग की लपटों में घिरकर 10 लोग ... पश्चिम बंगाल में बड़ा बदलाव! वोटर लिस्ट से एक साथ कटे 13 लाख नाम, जानें SIR के बाद अब क्या चल रहा है IPL 2026: तो ये खिलाड़ी करेगा CSK के लिए ओपनिंग! कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने खुद खोल दिया सबसे बड़ा रा... Operation Sindoor Film: बड़े पर्दे पर 'ऑपरेशन सिंदूर' की रियल स्टोरी दिखाएंगे विवेक अग्निहोत्री, नई ... Dividend Stock 2026: शेयर बाजार के निवेशकों की बल्ले-बल्ले! इस कंपनी ने किया 86 रुपये प्रति शेयर डिव...

भारत सरकार ने स्टार लिंक को इजाजत दी

तीन साल के इंतजार के बाद अचानक बात बन गयी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत सरकार ने आखिरकार एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को इजाजत दे दी है। स्टारलिंक को भारत में कारोबार करने के लिए जरूरी लाइसेंस मिल गया है। कंपनी 2022 से इस इजाजत का इंतजार कर रही थी। भारत के दूरसंचार मंत्रालय ने स्टारलिंक को लाइसेंस दे दिया है।

हालांकि इस मामले पर अभी तक केंद्र सरकार या मस्क की कंपनी की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है। स्टारलिंक एक इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर है। यह कंपनी आर्टिफिशियल सैटेलाइट या उपग्रहों के जरिए लंबी दूरी के इलाकों में इंटरनेट मुहैया कराती है। वे लंबे समय से भारतीय बाजार में उतरने की कोशिश कर रहे थे।

लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और कुछ अन्य कारणों को ध्यान में रखते हुए स्टारलिंक को सरकारी इजाजत मिलने में बार-बार देरी होती रही है। आखिरकार मस्क की कंपनी को मनचाही इजाजत मिल ही गई। केंद्र ने अभी तक अमेजन की कूपर को लाइसेंस नहीं दिया है। स्टारलिंक पहले ही भारत की दो बड़ी टेलीकॉम और इंटरनेट प्रोवाइडर एयरटेल और रिलायंस जियो के साथ समझौते कर चुकी है।

एयरटेल ने मार्च में मस्क की स्पेसएक्स के साथ स्टारलिंक के इंटरनेट को भारतीय बाजार में लाने के लिए औपचारिक समझौता किया था। बाद में मुकेश अंबानी ने भी इसी तरह का समझौता किया। हालांकि, दोनों ही मामलों में समझौता सशर्त था। कहा गया था कि एयरटेल या जियो भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही देश में स्टारलिंक के इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे।

स्टारलिंक की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, कंपनी लो अर्थ ऑर्बिट में स्थित छोटे सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवाएं देती है। पृथ्वी की सतह से 160 से 2000 किलोमीटर ऊपर की कक्षाओं को लो अर्थ ऑर्बिट कहा जाता है। इनकी निचली लोकेशन की वजह से इन सैटेलाइट से दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है।

माना जा रहा है कि अगर स्टारलिंक भारतीय बाजार में कारोबार शुरू करती है तो इंटरनेट सेवाएं और मजबूत होंगी। फिलहाल स्टारलिंक के तहत 6,750 सैटेलाइट हैं। दुनिया भर में लाखों लोग स्टारलिंक के इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में मस्क के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रिश्ते खराब हुए हैं।

मस्क ने ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्रंप पर सार्वजनिक तौर पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। इसके मद्देनजर ट्रंप ने मस्क की कंपनी को दी जाने वाली सब्सिडी और उसके साथ सरकारी अनुबंध रद्द करने की धमकी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ इस द्वंद्व के बीच, मस्क की विभिन्न कंपनियों के शेयर की कीमतों में भारी गिरावट आई है। मस्क को कई हजार करोड़ रुपये का निजी नुकसान उठाना पड़ा है। उस माहौल में, भारतीय बाजार में मस्क की कंपनी के क्लियरेंस की खबर सामने आई।