भारत में आतंकी हमले में शामिल था पाकिस्तान का आईएसआई
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पाकिस्तान भागने के फिराक में था वह
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पीछा कर एक होटल से गिरफ्तार किया गया
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पूछताछ में और गंभीर जानकारी भी दी है उसने
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पहलगांव में हमले से पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में बड़ी तोड़फोड़ की योजना बनाई थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दिल्ली से आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी से सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। गिरफ्तार व्यक्ति का नाम अंसारुल मियां अंसारी है।
सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति नेपाली मूल का है। उन्हें पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार आईएसआई ने पहलगांव से पहले देश में बड़ी तोड़फोड़ की योजना बना रखी थी। इसकी जिम्मेदारी अंसारुल को दी गई। पुलिस ने उसे दिल्ली के एक होटल से गिरफ्तार किया।
इस वर्ष जनवरी से केंद्रीय खुफिया एजेंसी और दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ राजधानी भर में विशेष अभियान चला रहे हैं। इसी ऑपरेशन के दौरान जासूसों को अंसारुल के ठिकाने का पता चला। इसके तुरंत बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार अंसारी आईएसआई की मदद से नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से भारत में घुसा था।
वह पाकिस्तान भागने की भी कोशिश कर रहा था। लेकिन पुलिस ने उससे पहले ही उसे पकड़ लिया। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में अंसारी ने बताया कि आईएसआई ने हर जगह अपना जाल फैला रखा है। इतना ही नहीं, उन्हें रक्षा संबंधी जानकारी एकत्र करने और उसे पाकिस्तान तस्करी करने का काम भी सौंपा गया था। अंसारी से बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की गई है। सूत्रों के अनुसार, वहां से भारतीय सशस्त्र बलों के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, अंसारी कतर में टैक्सी चालक के रूप में काम करता था। उसी दौरान वह पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में आया। कतर से अंसारी फिर पाकिस्तान चले गए। वहां जासूसी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें आईएसआई द्वारा भारत भेजा गया। अंसारी से पूछताछ के बाद एक अन्य संदिग्ध अखलाक आजम को रांची से गिरफ्तार किया गया।
आजम अंसारी को सुरक्षा संबंधी सभी जानकारी जुटाने में मदद करता था। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं को पता चला कि आईएसआई ने पहलगांव से पहले भारतीय धरती पर बड़ी तोड़फोड़ की योजना बनाई थी। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार अंसारी और आजम से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि स्लीपर सेल के तौर पर कौन काम कर रहा है।