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कहा कर छूट ही पर्याप्त नहीः चिदंबरम

ऊपरी सदन की बहस में कई मुद्दों पर बोले पूर्व वित्त मंत्री

  • वित्त मंत्री के बयानों में विरोधाभाष है

  • स्वर्गीय डॉ मनमोहन सिंह से सीखें सरकार

  • निर्यात और निवेश से ही विकास तेज होगा

नईदिल्लीः कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार की आर्थिक सोच पर सवाल उठाते हुए सोमवार को 2025-26 के बजट में पूंजीगत और सामाजिक क्षेत्र के बजट में कटौती कर के राजकोषीय घाटे को सीमित करने का प्रयास तो किया गया है पर इस बजट से अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना नहीं दिखती।

उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक फरवरी को लोक सभा में प्रस्तुत बजट में आयकर में छूट से उपभाग और आर्थिक गति विधि में तेजी की संभावना को क्षींण बताते हुए कहा कि बजट में व्यक्तिगत आय कर में एक लाख करोड़ रुपये की छूट भारत के 324 लाख करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) के मात्र 0.3 प्रतिशत के बराबर है।

उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या इतनी भर छूट से अर्थव्यवसथा को बल मिलेगा? उन्होंने कहा  आर्थिक दर्शन के बिना आर्थिक नीति नहीं बनती। उन्होंने वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण को पूर्व प्रधान मंत्री और 1991 में भारत में आर्थिक सुधारों की शुरूआत करने वाले तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह से सीख लेने का सुझाव देते हुए कहा,  1991 में भारत के सामने चुनौतियां आज से बड़ी थी।

उन्होंने इसी संदर्भ में यह भी सवाल किया कि  सरकार (स्वर्गीय) डॉ मनमोहन सिंह को भारत रत्न देने का विचार क्यों नहीं करती। उन्होंने कहा कि कर में कटौती का एक बड़ा हिस्सा बैंकों में जमा, विदेश यात्राओं , विदेशों में पढ़ाई आदि में चला जाएगा और घरेलू वस्तु तथा सेवाओं के उपभोग को कोई खास बढ़ावा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री को निर्यात और निवेश के इंजन को भी गति देनी चाहिए थी।

श्री चिदंबरम ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में केवल 3.2 करोड़ लोक आयकर देते हैं बाकी केवल कर विवरण भरते हैं और उनका कर का भुगतान शून्य रहता है। सरकार ने कर छूट वाली अधिकतम आयु सीमा को सात से बढ़ा कर 12 प्रतिशत किया है और यह छूट धनाढ्यों को भी फायदा कर रहा है।

इस छूट से 80-85 लाख करदाता कर के जाल से बाहर हो जाएंगे और 2.5 करोड़ करदाताओं को कर का फायदा होगा। इस लाभ पाने वालों में कवेल मध्यवर्गीय व्यक्ति ही नहीं, वे 2.27 लाख वे लोग भी जिनकी आय एक करोड़ रुपये वार्षिक से अधिक है, 262 लाख वे लोग जिनकी आय 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है और 23 वे लोग भी हैं जिनकी आय 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

उन्होंने कहा, ‘कर छूट से बचा पैसा केवल देश में वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर नहीं जाएगा बल्कि यह बैंकों, विदेश यात्राओं , विदेश शिक्षा पर ही जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त मंत्री कह रही है कि एक लाख की छूट दी है। इतनी बड़ी छूट देने के बाद वह कैसे दावा कर सकती है कि अगले वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत बढ़ेगी। उन्होंने कहा, मैं देखना चाहूंगा कि यह जादू कैसे घटित होता है।