Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bastar Accident News: दरभा और लोहंडीगुड़ा में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला; असुरक्षित सफर बन रहा ग्राम... Mahasamund Crime News: गांजा तस्करी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार; 10 माह से फरार आरोपी को ओडिशा से दबोचा Narayanpur News: अतिक्रमण हटाओ मुहिम में बवाल; बुलडोजर के नीचे लेटी महिला, नगर पालिका ने ढहाया दुकान... Chhattisgarh Monsoon Update: छत्तीसगढ़ में मानसून के लिए और करना होगा इंतजार; जानें क्या है मौसम विभ... Bastar Pride in Shimla: 71वीं अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता में बस्तर की बेटियों का डंका; जीता प्रथम... Surguja Murder Case: जमीन विवाद में खूनी संघर्ष; ट्रैक्टर से कुचलकर 60 वर्षीय बुजुर्ग की निर्मम हत्य... Kanker Diesel Crisis: कांकेर में गहराया डीजल संकट; पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें, किसानों ने किया... Chhattisgarh Monsoon Session: विधानसभा के मानसून सत्र की तारीखों का ऐलान; 13 से 17 जुलाई तक चलेगा सत... Achievements of Modi Govt: मोदी सरकार के 12 साल बेमिसाल; गरीब कल्याण से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक मि... Sukma News: आंधी-तूफान प्रभावितों को एक महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा; कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ...

दो युद्धों के बीच उभरता तीसरा खतरा

यूक्रेन वनाम रूस और इजरायल वनाम हमास का युद्ध अभी जारी है। दोनों के निकट भविष्य में समाप्त होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच हमास के साथ साथ लेबनान स्थित हिजबुल्लाह भी मैदान में उतर आया है। इनके अलावा ईरान समर्थन हाउती विद्रोहियों की कारगुजारियों ने पूरी दुनिया को प्रभावित कर दिया  है।

लाल सागर में स्वेज नहर के जरिये वाणिज्यिक पोतों के आवागमन पर मंडरा रहे संकट समाप्त होने का कोई संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। यह भूमध्यसागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को जोड़ने वाला एक अहम मार्ग है और गाजा पट्‌टी तथा उसके आसपास के इलाके में इजरायल-हमास जंग के कारण इसे लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

युद्ध के परिणामस्वरूप यमन में ईरान समर्थित हाउती विद्रोही गठजोड़ ने यमन और जिबूती के बीच बाब-अल-मांदेब खाड़ी में नौवहन पर हमले शुरू कर दिए। विद्रोही गठबंधन आश्चर्यजनक रूप से हथियारों से अच्छी तरह लैस है। उसने पोतरोधी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इससे पहले किसी लड़ाई में इतनी बड़ी तादाद में इनका इस्तेमाल नहीं किया गया था।

इनके साथ ही विद्रोहियों ने क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और छोटी नौकाओं का उपयोग करके भी जहाजों पर हमला किया और उन्हें धमकाया। हाउती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने इजरायल की ओर जा रहे पोतों पर हमले किए लेकिन वास्तव में यह सच नहीं है। ईरान के टेलीविजन पर एक अमेरिका जहाज को बंधक बनाने की खबर का वीडियो भी प्रसारित हुआ है।

अब यह संभव ही नहीं है कि वे जान सकें कि कौन सा जहाज किस दिशा में जा रहा है। इन हमलों के परिणामस्वरूप कई प्रमुख पोत संचालकों ने स्वेज नहर और लाल सागर का मार्ग छोड़ देने का निर्णय लिया। इन पोत संचालक कंपनियों में मेर्स्क, हपाग-लॉयड और मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी तथा कुछ प्रमुख तेल कंपनियां शामिल हैं।

कुछ दिन पहले मेर्स्क ने इस बात की पुष्टि की थी कि उसके टैंकर निकट भविष्य में इस क्षेत्र से नहीं गुजरेंगे। ऐसी अपेक्षाएं थीं कि मेर्स्क तथा अन्य कंपनियां सामान्य सेवाएं बहाल कर देंगी क्योंकि अमेरिका ने घोषणा की थी कि एक नौसैनिक कार्य बल इस इलाके में जलपोतों की सुरक्षा करेगा। परंतु यह कार्य बल जमीन पर प्रभावी असर छोड़ने में नाकाम रहा और इसके चलते पोत संचालकों ने किफायत के बजाय सावधानी बरतने को अधिक तरजीह दी।

ऐसे निर्णयों के परिणामस्वरूप भूमध्यसागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बीच नौवहन में लगने वाला समय और व्यय बहुत अधिक बढ़ गया है। तमाम पोत अपनी यात्राओं को स्थगित कर रहे हैं और अगर उन्हें यात्रा करनी ही पड़ रही है तो वे दक्षिण अफ्रीका में आशा अंतरीप (केप ऑफ गुड होप) के रास्ते से आवागमन कर रहे हैं।

भारत के औद्योगिक संगठनों के हालिया अनुमानों के मुताबिक यूरोप तक पोत भेजने की लागत 70 फीसदी से 200 फीसदी तक बढ़ गई है। विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में भारत के निर्यात की बात करें तो इसका असर उनके मार्जिन और उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता पर पड़ सकता है। भारत के पूर्वी तटों में से एक से निकला डीजल और जेट फ्यूल कार्गो पोत पहले ही विलंब से चल रहा है और उसकी दिशा बदल दी गई है। अन्य वैश्विक एकीकरण वाले क्षेत्रों पर भी असर पड़ सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और साथ ही 2023-24 में भारत की अप्रत्याशित रूप से मजबूत वृद्धि के लिए भी लाल सागर के हालात निकट भविष्य में सर्वाधिक अनिश्चितता वाले हालात बने रहने वाले हैं। पोतों के आवागमन का इस तरह बाधित होना आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को गहरी क्षति पहुंचाने वाला साबित होगा। यह मुद्रास्फीति के लिए भी बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।

इस संदर्भ में यह बात ध्यान देने लायक है कि अब जबकि स्वेज नहर के रास्ते का इस्तेमाल मुश्किल हो रहा है तो इसी बीच अमेरिका में इसकी जुड़वां नहर को भी वर्षों या दशकों में सबसे कम नौवहन के लिए विवश किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे की स्थिति बढ़ी है जिसके चलते वहां से गुजरना मुश्किल हुआ है।

पिछला वर्ष मध्य अमेरिका के दर्ज इतिहास का सबसे सूखा वर्ष था। विश्व व्यापार के इन दो प्रमुख मार्गों के पूरी क्षमता से काम नहीं करने की स्थिति में भविष्य के व्यापार और वृद्धि के लिए कई अहम जोखिम उत्पन्न हुए हैं। कुल मिलाकर लाल सागर इलाके में हाउती विद्रोहियों के ड्रोन हमलों की वजह से अनेक देशों को अपने युद्ध पोत तैनात करने पड़े हैं।

दूसरी तरफ इस रास्ते पर अड़चन होने की वजह से दूसरे रास्ते से तेल लाना अधिक खर्चीला होने वाला है। यह सभी उपाय अंततः आम आदमी की जेब पर बोझ डालने वाले हैं। लिहाजा वैश्विक गांव के परिदृश्य में यह समझा जा सकता है कि युद्ध कहीं का भी हो उसका कोई न कोई असर सभी देशों पर पड़ता है और इन सभी देशों में आखिर आम आदमी ही इनकी वजह से पिसता है।