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अधिकारियों ने कामगारों का हिस्सा झपटा

  • कोलकाता की बैठक में हुआ है फैसला

  • मौत के बाद आश्रितों की सुविधा अफसरों को

  • बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी कंपनी के जिम्मे

राष्ट्रीय खबर

रांची: कोल इंडिया के अधिकारी कामगारों का हिस्सा झपट रहे हैं। इसमें कोल इंडिया प्रबंधन ने भी अपनी सहमति दे दी है। विदित हो कि कोलया अधिकारी संगठन सीएमओएआई के एपेक्स बॉडी की कोल इंडिया अध्यक्ष और कार्यकारिणी निदेशकों के साथ शुक्रवार को कोलकाता में बैठक आयोजित की गई थी।

बैठक में कोयला अधिकारियों को महारत्न कंपनी के समतुल्य वेतनमान देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा कोयला अधिकारियों के कई अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने सहमति जताई है। इस क्रम में कामगारों की कुछ सुविधाओं को अधिकारियों को देने पर कोल इंडिया प्रबंधन सहमत हो गया है।

ज्ञात हो कि कोल इंडिया में अबतक लाइव रोस्टर की सुविधा कामगारों को ही मिल रही थी। इसके तहत कामगार की मृत्यु होने पर 12 वर्ष या उससे ऊपर के नाबालिग आश्रितों का नाम लाइव रोस्टर में दर्ज किया जाता है। उसकी उम्र 18 वर्ष होने पर वह स्थायी नौकरी के लिये आवेदन कर सकता है। इस बीच में प्रबंधन मृतक कामगार के परिवार को जीविका चलाने के लिये आर्थिक सहायता के तौर पर लगभग 26 हजार रुपये प्रति माह देता है।

आश्रित के स्थायी नौकरी हो जाने के बाद यह राशि नहीं दी जाती है। अबतक कोयला अधिकारियों को यह सुविधा नहीं मिल रही थी। कोलकाता में हुई बैठक में अधिकारी संगठन की ओर से कामगारों की तर्ज पर मृतक अधिकारियों के आश्रितों को भी यह सुविधा प्रदान करने की मांग प्रबंधन के समक्ष रखी गई।

इस पर प्रबंधन ने अपनी सहमति दे दी है। ज्ञात हो कि जेबीसीसीआई के समझौते के अनुसार आईआईएम, आईआईटी, प्रीमियम सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले कामगारों के बच्चों का शिक्षण शुल्क और हॉस्टल के खर्च को प्रबंधन देती है। अधिकारी संगठन ने कोयला अधिकारियों के बच्चों को भी यह सुविधा देने की मांग बैठक में उठाई थी।

इस मांग पर भी  कोल इंडिया प्रबंधन ने अपनी सहमति दे दी है। प्रबंधन ने कामगारों के तय मानक के अनुरूप काम करने की बात कही है। इस संबंध में कोयला कामगारों का कहना है कि कामगारों की कई सुविधायें प्रबंधन कोयला अधिकारियों को देने पर सहमत हो गया है। एैसे में मृतक के आश्रितों को नौकरी देने के मामले में प्रबंधन को समानता लानी चाहिये।

विदित हो कि वर्तमान में किसी अधिकारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को सेमी क्लर्क ग्रेड-1 की नौकरी दी जाती है। इसमें उसकी योग्यता से कोई मतलब नहीं होता है। वहीं कामगारों की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को कैटेगरी वन में बहाल किया जाता है। चाहे आश्रित उच्च योग्यताधारी ही क्यो न हो।

अब कामगार के आश्रितों को भी सेमी क्लर्क ग्रेड-1 में नौकरी दी जानी चाहिये। इसी तरह छुट्टी के मामले में भी समानता होनी चाहिये। दोनों एक ही परिवेश में काम करते हैं। यूजी में दोनों जाते हैं। कोयला उत्पादन में दोनों का समान योगदान रहता है। एैसे में अधिकारियों की तरह कामगारों को भी एक वर्ष में 30 दिन का ईएल मिलना चाहिये तथा सीएल भी बराबर मिलना चाहिये।